सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन से भी ज़्यादा खतरनाक है पीरियड्स का इन्फेक्शन

WASH logoEditor’s Note: This post is a part of #NoMoreLimits, a campaign by WASH United and Youth Ki Awaaz to break the silence on menstrual hygiene. If you'd like to become a menstrual hygiene champion, share your story on any one of these 5 themes here.

मुझे अपने जीवन में कभी पीरियड्स को लेकर किसी टैबूज़ का तो सामना नहीं करना पड़ा, लेकिन हाइजीन और पीरियड्स से जुड़ी सामान्य स्वास्थ्य की समस्याओं से ज़रूर दो-चार होना पड़ा है। और इस जानकारी के अभाव में उन समस्याओं की अपनी ही एक गलत समझ विकसित कर ली थी।

दो साल पहले मुझे बारथोलिन सिस्ट हुआ था। डॉक्टर ने बारथोलिन सिस्ट होने की वजह जानने के लिए मुझसे दो-तीन सवाल किए थे। जिनमें एक सवाल टैम्पून के इस्तेमाल के बारे में भी पूछा था। हालांकि मैंने कभी टैम्पून इस्तेमाल नहीं किया था। लेकिन, डॉक्टर की बात से मेरे अंदर टैम्पून का डर बैठ गया था कि टैम्पून इस तरह के इन्फेक्शन का एक कारण बन सकता है। और मैंने ये सोच लिया था कि टैम्पून का इस्तेमाल ही गलत है। डॉक्टर ने बाद में मेरे इस डर को दूर किया। उन्होंने बताया कि टैम्पून का इस्तेमाल गलत नहीं होता है, निर्भर करता है कि आप उसका इस्तेमाल कैसे कर रहे हैं।

गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर मन्जू माला के अनुसार सुपर अबज़ॉरवेंट टैम्पून (ज़्यादा नमी सोखने वाले) खतरनाक हो सकता है। साथ ही कई महिलाएं जिनको ज़्यादा ब्लीडिंग होती है वे एक साथ दो टैम्पून का इस्तेमाल करती हैं जो काफी खतरनाक होता है, इससे इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है।

2012 में कैलिफोर्निया की एक मॉडल लॉरेन वेज़र को सुपर अबज़ॉरवेंट टैम्पून के इस्तेमाल की वजह से अपना पैर गंवाना पड़ा था। वेज़र ने जिस टैम्पून का इस्तेमाल किया था वो टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम के लिए पॉज़िटीव था। यूएस नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार, टॉक्सिक शॉक सिंड्रोम (Toxic Shock Syndrome) के लगभग आधे केस की वजह टैम्पून का इस्तेमाल होता है।

हालांकि रिपोर्ट्स के अनुसार, सिर्फ टैम्पून का इस्तेमाल ही इसका कारण नहीं रहा। मॉडल के शरीर में पहले से ही बैक्टीरिया का कुछ स्त्रोत रहा होगा।

इसके साथ ही बिना पीरियड्स के टैम्पून का इस्तेमाल असामान्य वजाइनल डिस्चार्ज का कारण भी बनता है। इसलिए टैम्पून के इस्तेमाल के समय पूरी जानकारी बहुत ज़रूरी है।

रिप्रोडक्टिव सेक्शुअल हेल्थ पर काम करते हुए मुझे कई ऐसी औरतों और लड़कियों से मिलने का मौका मिला जिनके लिए हाइजीन मेंटेन करना बहुत मुश्किल काम था। वे ज़्यादातर मज़दूर परिवार से ताल्लुक रखने वाली महिलाएं थीं। उन्होंने बताया कि वे ज़्यादातर कपड़ों का ही इस्तेमाल करती हैं और यहां तक की एक ही कपड़े को धोकर उसे वापस इस्तेमाल करना उनके लिए मजबूरी है।

यहां मैं आपको बता दूं कि यूज़्ड कपड़ों को वापस से इस्तेमाल करने में कोई खास समस्या नहीं है। कई लोगों के लिए ये संभव ही नहीं कि वे बार-बार, अलग-अलग कपड़ों का इस्तेमाल करें। और उनके लिए पैड इस्तेमाल करने की बात तो दूर की हो जाती है।

लेकिन, इसमें इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि आप जिस यूज़्ड कपड़ों को धोकर इस्तेमाल कर रहे हैं, वो ठीक से साफ हुआ हो। उसे सर्फ या साबुन से धोने के साथ ही डेटॉल का भी इस्तेमाल करें ताकि उसमें लगा बैक्टीरिया मर जाए। साथ ही बैक्टीरिया को पूरी तरह खत्म करने के लिए उसे धूप में सूखाना बहुत ज़रूरी है। जो कि अधिकांश घरों में शर्म की बात मानकर घर के अंदर छुपाकर सुखाने के लिए डाल दिया जाता है। लेकिन, इस बात का ख्याल रखें कि आपकी ये बेवजह की शर्म आपके लिए बहुत भारी पड़ सकती है। इसके साथ ही आप अपने अंडरगार्मेंट्स को भी धूप में ज़रूर सुखाएं।

गंदे सैनेटरी पैड या कपड़ों के इस्तेमाल से काफी इन्फेक्शन का खतरा बना रहता है। ऐसा करने पर बैक्टेरिया वजाइना से होते हुए गर्भाशय में भी प्रवेश कर सकता है।

इन बैक्टीरिया से बचने के लिए हमें पीरियड्स के दौरान खुद के शरीर की साफ-सफाई भी बहुत ज़रूरी है। हर बार वॉशरूम जाने पर पूरे इलाके को अच्छी तरह से पानी से धोंए। इससे आपके शरीर पर बैक्टीरिया ठहर नहीं पाता है। इसके साथ ही हर बार अच्छे से हाथ धोना भी बहुत ज़रूरी है।

दरअसल, साफ-सफाई की अनदेखी की वजह से बैक्टीरिया वजाइना में प्रवेश कर सकता है जो आगे चलकर भयावह यूरिन इन्फेक्श का कारण बन सकता है। इन बैक्टीरिया में हेपेटाइटिस बी का स्त्रोत भी होता है।

ना सिर्फ अपनी साफ-सफाई बल्कि पीरियड्स के दौरान वातावरण की साफ-सफाई की ज़िम्मेदारी भी बहुत ज़रूरी है। यूज़्ड सैनेटरी पैड, कपड़ा, टैम्पून जैसी सामग्रियों का सही तरह से डिस्पोज़ल बहुत ज़रूरी है। इस्तेमाल किए गए सैनेटरी पैड्स का सही तरह से निपटान ना करना दूसरों के लिए भी काफी नुकसानदेह साबित हो सकता है। कारण, उन पैड्स, कपड़ों के बैक्टीरिया हवा और पानी में मिलकर वातारण में फैल जाते हैं।

ऐसा माना गया है कि सेक्शुअली ट्रांसमिटेड इन्फेक्शन से भी ज़्यादा खतरनाक पीरियड्स में साफ-सफाई की अनदेखी की वजह से होने वाले इन्फेक्शन होते हैं। क्योंकि शरीर से निकला हुआ खून बैक्टीरिया को वापस हमारे गर्भाशय में जाने का रास्ता बनाता है।

Let's ensure that no girl is limited by something as natural and normal as her period by making menstrual hygiene education compulsory in schools.

Tweet To HRD Minister Sign the petition

हर हफ्ते Youth Ki Awaaz हिंदी की बेहतरीन स्टोरीज़ अपने मेल में पाने के लिए यहां सब्सक्राइब करें।