सेक्रेड गेम्स: औरतों के मरने पर जागता है गायतोंडे

Posted by Nishi Sharma in Hindi, Media
July 21, 2018

मैंने विक्रम चंद्रा की लिखी किताब सेक्रेड गेम्स नहीं पढ़ी है। इसलिए गायतोंडे से मेरा पहली बार सामना इस किताब पर बनी नेटफ्लिक्स की वेब सीरीज़ सेक्रेड गेम्स में हुआ।

गायतोंडे की कहानी की शुरुआत एक औरत के कत्ल से होती है। वह अपनी कहानी खत्म करने से पहले भी एक औरत का कत्ल करता है। सबसे पहले गायतोंडे अपनी मां की बेवफाई पर पत्थर से सिर फोड़कर उनकी हत्या करता है। अंत में जोजो द्वारा बीस साल तक ‘चुतिया’ बनाये जाने पर वह उसे गोली मार देता है।

जोजो को गोली मारने के कुछ देर बाद ही वह खुद को गोली मार लेता है। मां का कत्ल गायतोंडे की कहानी का पहला अक्षर है और जोजो उसकी कहानी का आखिरी फुलस्टॉप।

सेक्रेड गेम्स के पहले सीज़न में दो और ऐसी औरतों की मौत हुई हैं, जो गायतोंडे के लिए अहम है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है यह एहसास होते जाता है कि अपने जीवन की हर औरत की मौत पर गायतोंडे ‘जाग’ जाता है। यह जागना हर बार अलग है।

उसकी माँ उसे ‘आज़ाद’ करके जाती हैं और इस आज़ादी में वह शहर में अपनी भूमिका की तलाश करता है। इस आज़ादी के बाद वह खुद को हर उस शख्स से आज़ाद कर देता है, जो उसके रास्ते का रोड़ा हो। चाहे वह हिन्दू होटल का उसका मालिक हो या कचरे का व्यापारी मोमिन।

दूसरी औरत जिसकी मौत अहम है, वह है ‘कुक्कू’। कुक्कू उसकी चाहत है, उसकी ख्वाहिश है। कुक्कू खुद को जन्नत कहती है और गायतोंडे मानता है कि कुक्कू ही जन्नत है। कुक्कू शरीर से भले पूरी औरत ना हो, गायतोंडे के लिए वह अपने होने में संपूर्ण है। और उसे पूरा देख लेने के बाद भी, गायतोंडे को उससे मोहब्बत है।

जिस वक्त गायतोंडे कह देता है कि उसे कुक्कू का जादू नहीं चाहिए, उसे कुक्कू चाहिए, दर्शक भी मान लेता है कि कुक्कू ही जन्नत है। और इसी के कुछ देर बाद होती है कुक्कू की मौत। इसके बाद गायतोंडे सदमे में रहता है। द्वेष से उसका शरीर सुलगते रहता है और अपने अंदर की आग वह भाड़े की औरतों के शरीर पर निकालता है। गायतोंडे को कुक्कू ने मरने से मना किया था। और इस बार वह मौत को चुनौती देने के लिए जागता है। परितोष भाई की मौत के बदले से हुई यह शुरुआत, उसे और शहर पर उसके खौफ को जगाए रहती है।

तीसरी औरत है सुभद्रा। गायतोंडे की बीवी। जो उसे परितोष भाई का बदला लेने के लिए उकसाती है और बदरिया भाइयों की मौत पर उससे कहती है कि गद्दार को मरना था तो मरना था। सुभद्रा गायतोंडे को ना सिर्फ उसके आक्रोश पर वैधता का ठप्पा लगाती है, बल्कि उसके दिमाग पर भी कब्ज़ा जमा लेती है।

अब तक गायतोंडे को उकसाने वाली एक औरत थी, कांता बाई। वही गणेश गायतोंडे को अपनी सत्ता पर काबिज़ होने का रास्ता दिखाती है। मगर सुभद्रा उसे वहां बने रहना सिखाती है। वह पहली औरत है जो उसे शारिरिक और मानसिक दोनों रूप से नियंत्रिण में रखती है। वह सेक्स के दौरान भी उसपर हावी रहती है।

सुभद्रा शुरू में जितनी सरल दिखती है, वह उतनी ही अधिक शक्तिशाली उभर कर आती है। इसलिए सुभद्रा की मौत सेक्रेड गेम्स के पहले सीज़न की सबसे भयंकर घटना है। इसमें गायतोंडे अस्सी मुसलमानों को मौत के घाट उतारता है और नफरत का प्रलय ला देता है। इसके बाद चालू होता है जेल में लाचारी, बेचारगी और तड़प का वह सिलसिला जो एक वक्त के बाद गायतोंडे के लिए बर्दाश्त से बाहर हो जाता है और उसे लगने लगता है कि वह मर जाएगा। और यहीं से शुरू होता है उसके जीवन का नया अध्याय। इस बार जागने के बाद गायतोंडे क्या तबाही लाता है, यह तो अगले सीज़न में ही पता चलेगा।

अंततः इतना तो मालूम है दर्शकों को कि उस अंतिम औरत जोजो की हत्या के बाद गायतोंडे कुछ ऐसे जागता है कि हमेशा-हमेशा के लिए सो जाना मंज़ूर करता है।

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