“केरल में BJP को वोट नहीं देने वालों को शिक्षित कहना शर्मनाक है”

23 मई को 17वीं लोकसभा चुनाव के परिणाम घोषित हुए। मोदी नाम की सुनामी में पूरा विपक्ष बह गया। बंगाल जैसा राज्य जहां चुनाव राजनीतिक हत्यायों के बिना सम्पन्न नहीं हो सकता, वहां भी इस बार बीजेपी ने अपने कई कार्यकर्ताओं को गंवाते हुए 18 सीट पर जीत दर्ज़ की।

पूरा भारत जहां इस ऐतिहासिक जीत को लोकतंत्र की जीत बता रहा है। वहीं, लिबरल सुलग उठे हैं। उनके लिए केरल और तमिलनाडु में बीजेपी का ना जीत पाना ही खुशी दे रहा है। कल से सोशल मीडिया पर एक पोस्ट लगातार घूम रही है कि शिक्षित लोगों के स्टेट केरल में बीजेपी को कोई सीट नहीं मिली फिर उनके शिक्षित होने का स्तर कितना अच्छा है, वह देख लेना चाहिए।

सोशल मीडिया
फोटो साभार: Twitter

क्या भारत के दो राज्यों के अलावा जितने भी राज्य हैं, वहां के लोगों को वे शिक्षित नहीं मानते? यदि ऐसी बात है फिर तो यह बेहद शर्मनाक है। क्या वे 543 सीटों में से 60 सीटों की राय को अहम मानते हैं या भारत का भविष्य उनके हिसाब से 10 करोड़ की जनसख्या वाले राज्य तय करेंगे? ऐसे में

केरल एक ऐसा राज्य है जहां पश्चिम बंगाल के बाद सबसे ज़्यादा राजनीतिक मर्डर हुए हैं। आये दिन वहां से खबरें आती हैं कि कम्युनिस्टों ने किसी की हत्या कर दी। इसमें ऐसा नहीं है कि सिर्फ दूसरी पार्टी के लोग ही मारे जाते हैं। इसमें नुकसान कम्युनिस्टों का भी होता है।

क्या शिक्षित लोग विचारधारा के नाम पर किसी के जीवन को छीन लेते हैं? क्या शिक्षित लोग विचारधारा के नाम पर बच्चों को बिलखता हुआ देखना पसंद करते हैं? शायद यह शिक्षित लोगों की निशानी नहीं है।

आतंकी विचारधार से क्यों प्रभावित होते हैं केरल के लोग?

केरल एक ऐसा राज्य है जहां से सबसे ज़्यादा लोग आतंकी विचारधारा से प्रभावित होते हैं। भारत में सबसे ज्यादा ISIS (इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड सीरिया) में शामिल होने वाले लड़के केरल से ही आते हैं। अभी हाल ही में श्रीलंका में हुए आतंकी हमले में जिन आतंकियों का नाम सामने आया है उनमे से कुछ केरल से भी हैं।

सिमी (आतंकी संगठन) जो अलीगढ में स्थापित हुआ था उसका सबसे ज़्यादा प्रभाव केरल में ही देखा गया था। इस संगठन को 2001 में बैन कर दिया गया था। पीएफआई, जिसके नेताओं में अधिकतर सिमी के ही लोग हैं उनके द्वारा 2013 में एक आतंकी ट्रेनिंग कैंप कन्नूर में चलाया गया था। इस कैम्प को चलाने के लिए 21 पीएफआई कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया था। वैसे ध्यान रहे कि यह वही कन्नूर है जहां से अभी केरल के मुख्यमंत्री आते हैं।

संस्कृति की रक्षा के लिए हिन्दुओं को कोर्ट तक जाना पड़ा

केरल, वह राज्य है जहां हिन्दुओं को अपनी संस्कृति की रक्षा के लिए कोर्ट जाना पड़ा। वहां की सरकार सबरीमाला में सैकड़ो सालों की संस्कृति को नष्ट करने के लिए लगातार अड़े रही। भक्तों पर लाठीचार्ज करवाया गया। पतनमथिट्टा से चुनाव लड़े बीजेपी प्रत्याशी के. सुरेन्द्रन के खिलाफ सबरीमाला वाले मामले में ही केवल 240 केस रजिस्टर हुए हैं।

सबरीमाला फैसले का विरोध कर रहीं महिलाएं
सबरीमाला फैसले का विरोध करती महिलाएं। फोटो साभार: Getty Images

यहां की सरकार ने सबरीमाला में महिलाओं से एक दीवार बनवाई जिसमें मुस्लिम महिलाओं को भी शामिल किया गया था। केरल ही वह राज्य है जहां सड़क पर बीफ पकाकर खाया गया था। केरल ही वह राज्य है जहां 2014 में ‘किस ऑफ लव’ नाम का कैम्पेन चलाया गया था।

केरल, वह राज्य है जहां कुल जनसंख्या की 27 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है, जिसे भाजपा का घोर विरोधी समुदाय माना जाता है। तब भी वहां भाजपा ने 14 सीटों पर लड़कर 5 प्रतिशत से ज़्यादा अपने वोट शेयर में वृद्धि की है। जिस तरह पश्चिम बंगाल में भाजपा को अछूत समझा जाता था, शायद अब वह दिन दूर नहीं जब केरल में भी भगवा लहरा रहा हो।

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