अलीगढ़ की घटना पर गहराता हिन्दू-मुस्लिम विवाद

अलीगढ़ के टप्पल में ढाई साल की मासूम बच्ची की हत्या का मामला सामने आया है, जिसमें ज़ाहिद और असलम नाम के दो लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। इस मामले पर नाम सिर्फ अलीगढ़ में अलग-अलग संगठनों व आम लोगों द्वारा काफी उग्रता से विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है, बल्कि देशभर में हालात काफी गंभीर हैं।

पुलिस का कहना है कि आरोपी ने मृतक बच्ची के पिता से 50 हज़ार रुपये उधार लिए थे, जिसमें से 40 हज़ार रुपये वह लौटा चुका था लेकिन बाकी के 10 हज़ार रुपये लौटने में वह देर कर रहा था। जिस बात को लेकर दोनों में गंभीर झगड़ा हुआ था। जिसके बाद आरोपी ने बच्ची के साथ ऐसी बर्बरता की।

उत्तर प्रदेश में बलात्कार की कई वारदातें हुई हैं

अब बात करते हैं इस वारदात के बाद बनने वाले माहौल की। हर बार की तरह इस बार भी सोशल मीडिया पर आक्रोश के साथ-साथ फेक न्यूज़ और भड़काऊ कंटेंट्स की बाढ़ आ गई है लेकिन ध्यान देने वाली बात यह है कि उत्तरप्रदेश में ही बीते दिनों बलात्कार की कई वारदातें हुई हैं।

रायबरेली में एक 9 वर्षीय नाबालिग के साथ गैंगरेप हुआ। मुज़फ्फरनगर में एक दलित नाबालिग को रेप कर ज़िंदा जला दिया गया। सबसे ताज़ा मामला उत्तरप्रदेश के कुशीनगर में दर्ज़ हुआ है। जिसमें कहा जा रहा है कि एक 12 वर्षीय दलित नाबालिग को कुछ दबंगों ने उसके माता-पिता के सामने ही घर से खींच कर बलात्कार किया और परिजनों से मारपीट की।

भगवा कपड़ा बांधकर जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं

अलीगढ़ के टप्पल में घटना की रिपोर्टिंग करने पहुंची द प्रिंट अखबार की रिपोर्टर ज्योति का कहना है कि टप्पल गाँव में फरीदाबाद, गुरूग्राम और दिल्ली से भर-भरकर गाड़ियां जा रही हैं। गाँव में हज़ारों की संख्या में सीआरपीएफ और पुलिस वाले इन बाहरी युवकों को खदेड़ रहे हैं। जिससे दंगे की स्थिति हो गई है।

प्रोटेस्ट
फोटो  साभार: Twitter

मुंह पर भगवा कपड़ा बांधे किसी विशेष समुदाय से बदला लेने की बात करते हुए जय श्री राम के नारे लगा रहे हैं। कई लोग सेना के जवानों से ही भिड़ रहे हैं। इनकी गाड़ियों को हाईवे पर रोका जा रहा है। इलाके में कर्फ्यू जैसे हालात हैं।

ट्विंकल के घर के सामने शोक-सभा में टीका लगाए हुए एक शख्स आता है और सबको किसी अलग भाषा में कुछ समझा रहा होता है। अंदर ट्विंकल के पापा मुझसे कह रहे हैं कि हम इन लोगों की बातों में नहीं आ रहे हैं।

आसिफा केस के दाग को धोने की कोशिश हो रही है

इतनी गंभीर और अमानवीय घटना पर भी राजनीति शुरू हो चुकी है। गौर करने वाली बात यह है द प्रिंट के वीडियो में प्रदर्शनकारी अपने आप को बीजेपी से जुड़ा बताते हैं।सोशल मीडिया पर भी ऐसा ही वर्ग प्रदेश की योगी सरकार को किसी भी ज़िम्मेदारी से बचाते हुए बॉलीवुड से लेकर हर उस शख्श पर भद्दे गाली-गलौज से निशाना साध रहा है जो आसिफा केस में न्याय की मांग कर रहे थे।

ज़मीन से लेकर सोशल मीडिया पर हुड़दंग मचा रहे इस वर्ग के बयानों को देखेंगे तो पाएंगे कि यह टप्पल, अलीगढ़ कांड के सहारे आसिफा केस के दाग को धोने की कोशिश की जा रही है। उनके बयानों से मनघडंत, अपंग और तुलनात्मक ज्ञान का भी पता चलता है क्योंकि आसिफा केस में हिन्दू एकता मंच और बीजेपी के मंत्रियों ने आरोपियों को बचाने के लिये तिरंगा यात्रा निकाला था लेकिन यहां हर कोई ट्विंकल के दरिंदों के लिए फांसी मांग रहा है।

भगवा गमछा बांधे उन्मादी ब्रिगेड अलीगढ़ के टप्पल पर डटा हुआ है

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के छात्रों ने विरोध मार्च निकालकर आरोपियों के लिए सख्त से सख्त सजा की मांग की है। बीते कुछ दिनों उत्तरप्रदेश से रेप की कई घटनाएं सामने आई लेकिन भगवा गमछा बांधे उन्मादी ब्रिगेड सिर्फ अलीगढ़ के टप्पल पर ही डटा हुआ है

हिन्दुत्व की राजनीति
फोटो साभार: Twitter

2017 में प्रकाशित नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट में भारत के दो बीजेपी शासित राज्य को बलात्कार की वारदातों के मामले में मध्यप्रदेश और राजस्थान को नंबर-1 और नंबर-2 का स्थान मिला है लेकिन तब आपने किसी भगवा ब्रिगेड का कोई आक्रोश नहीं देखा होगा क्योंकि वर्तमान राजनीति में गुनाहगार की जाति और धर्म देखने का नया प्रचलन शुरू हुआ है।

योगी सरकार ज़िम्मेदारी से बचना चाह रही है

राजस्थान में फिलहाल काँग्रेस की सरकार है। वहां से पिछले महीने एक महिला से गैंगरेप की घटना सामने आई थी। जिसमें बीजेपी ने काँग्रेस पार्टी और गहलोत सरकार को कटघरे में खड़ा किया था। जिसके बाद आरोपी पकड़े गए थे। इसके ठीक उलट उत्तरप्रदेश में बीजेपी की सरकार है और योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री हैं लेकिन सरकार साफ-साफ इस ज़िम्मेदारी से बचना चाह रही है।

उनके समर्थकों का हर कुतर्क प्रदेश के योगी सरकार को बचाता है और घूम फिरकर काँग्रेस, राहुल गांधी, मुस्लिम समुदाय, सोनम कपूर और स्वरा भास्कर से होते हुए हिन्दू राष्ट्र की मांग पर खत्म हो जाता है। बात साफ है कि बच्ची की मौत के बहाने कट्टरवाद की जड़ों को मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

क्या रमज़ान में मुसलमान यह करते हैं?

सोशल मीडिया पर ऐसे कंटेंट्स शेयर किए जा रहे हैं जिनमें ज़ोर देकर लिखा जा रहा है कि क्या रमज़ान में मुसलमान यह करते हैं? क्या इस्लाम मुसलमानों को यह सिखाता है? जानबूझ कर बार-बार रमज़ान और इस्लाम शब्द पर ज़ोर देकर इस्तेमाल किया जा रहा है ताकि एक अपराधी के निजी अपराध को रमज़ान और इस्लाम जैसे शब्दों से जोड़कर पूरे समुदाय को बदनाम कर नफरत फैलाया जा सके।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

सोशल मीडिया पर लोगों के बयानों को पढ़ने से लगता है जैसे अब अपराध की परिभाषा आरोपी के धर्म को देख कर तय की जाएगी क्योंकि बीते एक महीने के अंदर ही पूरे उत्तरप्रदेश में लगभग आधा दर्ज़न बलात्कार के मामले दर्ज़ हुए हैं लेकिन आरोपी का नाम ज़ाहिद और असलम ना होने से पीड़ितों को ऐसी सहानुभूति नहीं मिली।

अलीगढ़ पुलिस मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं

अलीगढ़ पुलिस मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं करती। शायद इसलिए भी क्योंकि कई दिनों से लाश को छुपाए जाने के कारण लाश की हालत खराब थी लेकिन उन्मादियों ने स्वयं के फायदे के लिए इस दुनिया से अलविदा कह चुकी मासूम को रेप का तमगा भी दे दिया ताकि अपने हिसाब से माहौल को और गर्म किया जा सके।

गिद्ध वह भी हैं जिन्होंने बच्ची की ऐसी हालत की और गिद्ध यह भी हैं जो किसी पोलिटिकल पार्टी की तरफ से आकर एक पूरे समुदाय से बदला लेने की बात करते हैं। जब भी लगता है कि यह कट्टरता का आखिरी पड़ाव होगा हम गलत साबित होते हैं।

10 मई को आसिफा केस में पठानकोट न्यायलय ने आरोपियों को बलात्कार और हत्या के मामले में सजा सुनाया था लेकिन नरेंद्र मोदी की कट्टर समर्थक मधु किश्वर गुनाहगारों के पक्ष में डट कर खड़ी हो जाती है और इस फैसले को ही लोकतंत्र का मज़ाक और भारतीय न्याय व्यवस्था को ही विकृत और घटिया करार देती हैं।

आसिफा केस में न्याय मांगने वाले आज चुप क्यों हैं?

बीजेपी समर्थक वीडियो बनाकर कहते हैं, जो लोग आसिफा केस में न्याय मांग रहे थे वह आज चुप क्यों हैं? मुस्लिम संस्थाएं इन आरोपियों के खिलाफ फतवा क्यों नहीं जारी करती? जबकि यह बात पूरी तरह से झुठ है।

कोई चुप नहीं है। सबने इस घटना पर अपना दुःख व्यक्त कर जल्द न्याय की मांग की है लेकिन यह झूठ यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर सब जगह फैलाया जा रहा है ताकि जिनका राजनीतिक अस्तित्व ही हिन्दू-मुस्लिम नफरत पर टिका हो उनके पक्ष में माहौल बनाया जा सके।

कोई असल समस्या पर बात नहीं कर रहा

विरोध के इस तरीके से यह साफ जाहिर होता है कि उनका समर्थन पीड़ित बच्ची या उसके परिवार के पक्ष में तो कतई नहीं है लेकिन एक पोलिटिकल पार्टी का बचाव और उसकी काम्पैग्निंग ज़रूर है। अगर बात सिर्फ फतवा निकालने की है तो मुस्लिम संस्थाएं आरोपियों के खिलाफ फतवा जारी कर अपनी नाराज़गी जाहिर कर सकती है लेकिन ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि इस भीड़ में कोई भी असल समस्या की बात नहीं कर रहा है।

वर्तमान एजुकेशन सिस्टम लोगों को मेमोरी कार्ड बना रहा

लोग फांसी की मांग कर रहे हैं और ऐसे घिनौने जु़र्म के लिए किया भी जाना चाहिए लेकिन क्या यह बलात्कार जैसी घटनाओं को रोक पा रहा है? जवाब है नहीं क्योंकि हमारा एजुकेशन सिस्टम लोगों में इनफार्मेशन भर कर सिर्फ उन्हें मेमोरी कार्ड बना रहा है।

उन्हें सामाजिक और मानवीय मूल्य स्कूल, विश्विद्यालय या घरों में बिल्कुल नहीं सिखाए जा रहे हैं। ज़रूरी है कि घरों से ही बच्चों को सदाचार, संस्कार, उदारता और दूसरों की मर्ज़ी की इज्ज़त करना सिखाया जाए। लोगों को सिखाया जाए कि किसी और का रहन-सहन, सभ्यता और संस्कृति आपके लिए अजीब हो सकती है पर गलत नहीं।

शिक्षा के माध्यम से लोगों का ब्रेन वाश किया जाए

फिल्मों से लेकर अश्लील गानों तक महिलाओं को एक आकर्षक सेक्स ऑब्जेक्ट के रूप में नॉर्मलाइज़ कर दिया गया है। People’s Union for Civil Liberties (PUCL) की रिपोर्ट कहती है कि 90% बलात्कार सिर्फ दलितों के हुए है तो यह आंकड़े बहुत कुछ बयान करते हैं।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर

लोग समाज में जाति-धर्म के हिसाब से भेद करते हैं इसलिए जु़र्म भी उसी हिसाब से किए जा रहे हैं। ज़रूरी है कि दलगत धार्मिक राजनीति के हिसाब से ब्रेन वॉश्ड हो रहे लोगों को शिक्षा के माध्यम से ज़ोर देकर उन्हें सामाजिक, मानवीय-संवेदनाओं और मूल्यों के ज्ञान से ब्रेन वॉश किया जाए क्योंकि कानूनी दण्ड प्रक्रिया इसके लिए काफी साबित नहीं हो रही है।

पॉलिसी मेकर्स को समझना होगा कि जो कारगर नहीं वह काम के लिए काफी नहीं। ऐसे में यह बेहद ज़रूरी हो जाता है कि अब किसी नए विकल्प पर ज़ोर देकर हत्या और बलात्कार जैसे राक्षसी जु़र्म को काबू किया जाए।

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