“जातिगत आरक्षण सवर्णों और दलितों के बीच महज़ एक भेदभाव है”

JaatiNahiJaati logoEditor’s Note: यह पोस्ट Youth Ki Awaaz के कैंपेन #JaatiNahiJaati का हिस्सा है। इस कैंपेन का मकसद आम दिनचर्या में होने वाले जातिगत भेदभाव को सामने लाना है। अगर आपने भी जातिगत भेदभाव देखा है या महसूस किया है या सामाजिक रूप से इसे खत्म करने को लेकर आपके पास कोई सुझाव है तो ज़रूर बनिए हमारे इस कैंपेन का हिस्सा और अपना लेख पब्लिश कीजिए।

आज हम एक बहुत अहम मुद्दे पर बात करना चाहते हैं, जो केवल जातिगत ही नहीं है बल्कि देश के विकास का भी अहम हिस्सा है। यह मुद्दा शायद बड़े लोगों के लिए महत्वपूर्ण नहीं है मगर यह दुनिया तो अमीरों से ज़्यादा गरीबों से भरी हुई है, इसलिए इस मुद्दे को उठाना मैं ज़रूरी समझती हूं। यह मुद्दा है आरक्षण का!

एक वक्त था जब हमारे देश में दलितों की हालत बहुत ही दयनीय होती थी। उन्हें हर मौलिक अधिकारों और सुविधाओं से वंचित रखा जाता था। उनका पूर्ण रूप से शोषण भी किया जाता था। वहीं, दूसरी ओर ऊंची जाति के लोगों का वर्चस्व काफी अधिक था।

दलितों की यह स्थिति देख बाबा साहेब अंबेडकर ने उनके लिए आरक्षण का कानून बनाया जिससे उन्हें आर्थिक और सामाजिक विकास में मदद मिली। यह कानून उस वक्त उचित भी था मगर आज स्थिति कुछ और है। आज कोई भी जातिगत रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से गरीब और अमीर है।

जातिगत भेदभाव
फोटो साभार: pixabay

आज ना जाने कितने ऊंची जाति के लोग हैं जो इस संकट से जूझ रहे हैं। उनके लिए अपने नाम के साथ ऊंची जाति का टाइटल लगाकर घूमना बोझ सा बन गया है। यह सिलसिला शैक्षणिक संस्थानों से शुरू होकर नौकरियों तक चलता है। अब कोई ऊंची जाति का व्यक्ति परीक्षा में अच्छे अंकों से उत्तीर्ण होकर भी एक अच्छी नौकरी नहीं पा सकता। वहीं, एक दलित व्यक्ति कम अंक लाकर भी अच्छी नौकरी पा लेता है। यह कहां का न्याय हुआ?

शैक्षणिक संस्थानों में दलित स्टूडेंट्स को फीस में विशेष रूप से छुट मिलती है, जबकि ऊंची जाति के स्टूडेंट्स को ज़्यादा पैसे देने पड़ते हैं। यानि कि जातिगत आरक्षण सवर्णों और दलितों के बीच महज़ एक भेदभाव ही तो है।

इस जातिगत भेदभाव के कारण उनके आर्थिक जीवन और आर्थिक विकास पर बहुत बुरा असर पड़ता है। जब हम जानते हैं कि कोई भी व्यक्ति जातिगत रूप से नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से गरीब होता है फिर आरक्षण जाति के आधार पर क्यों दिया जाए?

उस वक्त जो नियम बनें, वे हालातों के हिसाब से सही थे मगर वक्त के हिसाब से हालात भी बदलते हैं। अब आरक्षण भी आर्थिक रूप से देने की ज़रूरत है, जातिगत रूप से नहीं। ऐसा करने से इस देश की हर जाति और हर युवा का विकास होगा।

अगर सरकार देश की हर जाति और हर युवा को विकास के लिए एक ही पैमाने में देखेगी तभी देश का वास्तविक विकास हो पाएगा और जातिवाद जैसी चीज़ों का खात्मा हो पाएगा। इसके लिए सभी युवाओं को आवाज़ उठानी पड़ेगी क्योंकि यह केवल जातिगत ही नहीं, बल्कि देश के विकास से जुड़ा एक अहम मुद्दा है।

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