‘माँ ने कहा, तुम्हारे यूज़्ड कॉन्डम्स फेंक दिए’: फैमिली के साथ सेक्स पर बातचीत के किस्से

कईयों के साथ ऐसा हुआ है कि उनकी माँ घर से निकलने के ठीक पहले उनके सामान में मिठाई का एक और डिब्बा ठूसने गई है और उसे सामान के अंदर कंडोम का पैकेट मिला है। क्या आपके पास भी ऐसा कोई किस्सा है? शायद आपके पास ऐसा किस्सा नहीं है या यह किस्सा सुनने से ही आपको टेंशन आ रही है।

एजंट्स ऑफ इश्क में हम यह सोच रहे हैं कि क्या परिवार में हुई सभी बातचीत जहां सभी को पता चलता है कि हर किसी के जीवन में सेक्स भी चल रहा है। ऐसी बातचीत में सदमा, खामोशी, बेहोशी, दरवाज़ों का ज़ोर से बंद करना और यह डर कि आपकी अगले हफ्ते शादी कर दी जाएगी। यह सब शामिल होना ज़रूरी है? हमने लोगों से पूछा कि क्या वह अपने परिवार से कामुक रूप से कार्यरत होने की बात कर सकते थे? और अगर वह बात कर सकते थे तो ऐसी बात करने में उन्होंने कौन-सी बाधाओं का सामना किया?

हमारे सर्वे के ज़रिये कुछ दिलचस्प बातें सामने आईं। हमने इस विषय पर मनोवैज्ञानिक सोनाली गुप्ता, यौन शिक्षिका स्रीनिधी राघवन और बच्चों की लेखिका अनू सिंघ चौधरी के साथ एक ट्विटर चैट भी की।

सर्वे और ट्विटर चैट में मिले उत्तरों से स्पष्ट था कि यह एक चिंताजनक क्षेत्र है और यह भिन्न तरीकों से चिंताजनक है। माता-पिता अपने बढ़ते बच्चों के सामने सेक्स पर बातचीत करने में बेचैनी महसूस करते हैं और उन्हें यह स्वीकार करने में तकलीफ होती है कि उनके बच्चे सेक्स करने लगे हैं।

बच्चों की दृष्टिकोण से भी यह चिंताजनक है। प्रौढ़ बच्चों को यह स्वीकार करने में अजीब लगता है कि उनके माता-पिता सेक्स करते होंगे और वह उनके साथ एक जाना-पहचाना रवैया अपनाते हैं, तुम पूछो मत मैं नहीं बताऊंगा लेकिन जोश दिलाने वाली बात यह भी थी कि लग रहा है, लोग इस मसले को लेकर और सहज हो रहे हैं। कई लोगों ने कहा कि उनके परिवार वालों को पता नहीं था कि वह कामुक रूप से कार्यरत थे जबकि दूसरों ने इन गुफ्तगू के बारे में दिल को छूने वाली और हास्यप्रद किस्म की कहानियां सुनाईं।

यह रहे सेक्स पर गुफ्तगू के नतीजे

जड़ से शुरू करते हैं। क्या आपके कोई घरवाले यह जानते हैं कि आप सेक्स करते हो? (जानना लेकिन उस बात को अस्वीकार करना भी चलेगा।) कई लोगों ने कहा कि उनके परिवार वालों को पता था। कुछ लोगों ने कहा कि उनके भाई बहनों को पता था लेकिन उनके माता-पिता को नहीं। कुछ लोगों की सिर्फ माताओं को पता था और चंद लोगों के माता-पिता दोनों को पता था लेकिन कई लोगों ने कहा, “नहीं उनके परिवारवालों को पता नहीं था। वे उसके बारे में बात नहीं करते थे और इस बात से उन्हें कोई ऐतराज़ नहीं था”।

सेक्स पर नादान होने का बुलबुला कैसे फूटा?

अगर उन्हें पता है, तो उन्हें कैसे पता चला? हमें बताएं कि आपके नादान होने का बुलबुला उनके मन में कैसे फूटा? कई बार यह सिर्फ एक स्वाभाविक और अंतर्निहित स्वीकरण था। इस बात को मन में रखते हुए कि दो लोग एक दूसरे को डेट कर रहे थे और यह समझी हुई बात थी कि सेक्स भी इसका एक हिस्सा था।

जैसे एक लड़की ने कहा

मुझे लगता है कि उन्होंने अंदाज़ा लगाया। मैं कुछ दिन की छुट्टी पर ऐसे शहर गई जहां मेरा तब का बॉयफ्रेंड रहता था। मैंने उन्हें बताया नहीं कि मैं उसके साथ रह रही थी लेकिन वह कल थोड़े ही जन्मे थे।

हां यह सच है कि वह कल नहीं जन्मे थे और रही बात कि बच्चे कैसे जन्म लेते हैं? ठीक है, आगे बढ़ते हैं लेकिन कुल मिलाकर कंडोम ने इन कहानियों में महत्वपूर्ण किरदार निभाया। (हम तो इस बात से खुश हैं। इसका मतलब है, हर तरफ लोग सुरक्षित सेक्स कर रहे हैं।) यह थी उस महत्त्वपूर्ण खोज के बारे में सबसे दिलचस्प कहानियां।

मेरी माँ ने पूछा सेक्स के बारे में  

मेरी अलमारी में ढेर सारे कंडोम के पैकेट हैं। कभी-कभार मेरी माँ मेरे कपड़े रख देती है।

(एजेंट्स की टिप्पणी: शायद वक्त आ गया है कि आप अपने कपड़े खुद रखना शुरू करें)

मुझे लगता है कि मेरे बॉयफ्रेंड के साथ गुज़ारी हुई रात के अगले दिन मेरे शरीर पर चुंबन के निशान मेरे पिता के ध्यान में आए हैं। मेरा पहला सच्चा बॉयफ्रेंड, मैं और हमारे दोस्त सैर पर गोवा जाते थे। सैर से पहले मेरी माँ ने हंसी-मज़ाक में मुझसे पूछा कि क्या मैं मेरे बॉयफ्रेंड के साथ पहली बार सेक्स करने वाली थी? फोन पर पूछे गए इस सवाल ने मुझे पूरी तरह से घबराया हुआ छोड़ दिया जबकि वह अपनी ओर से खिलखिलाकर हंसती रही। सेक्स का ज़िक्र करने का उसका यह तरीका बड़ा हास्यप्रद था। मेरी बहन को मेरे सभी मज़ेदार किस्से पता हैं।

मैंने भाई को सेक्स से जुड़ी शिक्षा दी 

मेरा भाई उम्र में मुझसे दो साल छोटा है और जब वह 14 साल का था तब मैंने उसे लैंगिकता के बारे में पूरी शिक्षा दी थी। मादा प्रजनन तंत्र के चित्रों से लेकर रजोधर्म के बारे में जानकारी तक, मैंने कुछ भी नहीं छोड़ा था।

हम दोनों करीब हैं और जबसे हम दोनों ने डेट करना/सेक्स करना शुरू किया तबसे हम हमारी प्यार/सेक्स की ज़िंदगी की कहानियां एक दूसरे को बताते आ रहे हैं। मैं सभी लिंगों की ओर आकर्षित हूं और उसे इससे बिल्कुल भी ऐतराज़ नहीं है।

मेरी माँ ने मुझे कई सालों तक मेरी यौन ज़िंदगी के बारे में कुछ पूछा नहीं। 27 साल की उम्र तक मेरी कोई सच्ची प्रेमिका या प्रेमी नहीं था और प्रेम संबंध के बाहर किए गए सेक्स के किस्से मैंने उसे नहीं बताए। खैर, वह मेरी सीमा रेखाओं का आदर करती हैं, जो बड़ी अच्छी बात है। आखिर 29 साल की उम्र में मैंने उसे कह ही दिया कि मैं किसी को डेट कर रही थी। उसे यह बात ठीक लगी और वह यह भी जान गई थी कि मैं उस शख्स के साथ सेक्स करती थी लेकिन उसने तब तक कुछ नहीं पूछा जब तक मैं उसे कुछ बताना नहीं चाहूं। मुझे मेरी माँ बहुत पसंद है।

(एजेंट्स: हां स्पष्ट है, तुम्हें वह क्यों अच्छी लगती है?)

 

परिवार को सेक्स के बारे में कैसे बताएं और यह बताकर क्या लगता है?

अगर आपके परिवार को पता नहीं है कि आप किसी के साथ सेक्स कर रहे हो, तो उन्हें यह बात बताने के बारे में आपको क्या लगता है? मेरे भाई और मेरी माँ को बताना ज़रूरी नहीं है। जब मैं 24 साल की थी तब मेरे पिता ने मुझे कहा था,

बेटा, तुम्हें पता है कि मैं तुमसे प्यार करता हूं और तुम पर विश्वास करता हूं। तुम सोच समझकर ज़िंदगी जीती हो और तुम मुझे अच्छी तरह से जानती हो। अगर तुम ऐसा कुछ कर रही हो जो तुम्हें पता है मुझे तकलीफ पहुंचाएगा तो बस मुझे बताना मत। अगर तुम्हें कभी मेरी मदद कि ज़रूरत हो तो मेरे पास आना लेकिन उसके अलावा बताने की कोई ज़रूरत नहीं।

मुझे यह बहुत मज़ेदार लगा और यह उपाय हम दोनों के लिए बहुत अच्छे से काम में आया। मैं उन्हें नहीं बताती कि मैं सेक्स करती हूं चूंकि वह इस जानकारी से परेशान हो जाएंगे और वह बहाना करते हैं कि उन्हें पता नहीं है और इससे हम दोनों खुश हैं।

मैं सेक्स और बॉयफ्रेंड के बारे में बताना चाहती हूं 

अब जब मैं 30 साल की हूं। मैं सचमुच उन्हें बताना चाहती हूं लेकिन वह पूरी तरह से घबरा जाएंगे और अपने बॉयफ्रेंड के घर मैं जब चाहूं रहने के लिए जाना और भी मुश्किल हो जाएगा। अटपटा मामला, हालांकि वह बातचीत मज़ेदार रही। उस दिन के बाद से मैं माँ के साथ कभी यह बात नहीं कर पाई हूं कि मैं किससे मिल रही हूं (खासकर अगर वह बहुत अहम रिश्ता नहीं हैं) और मैं किसके साथ सेक्स कर रही हूं।

मुझे नहीं लगता कि वह प्रेम संबंध के बाहर किया गया सेक्स समझती हैं। 6 सालों से मैं किसी प्रेम संबंध में नहीं रही हूं लेकिन मैंने सेक्स बहुत किया है। उन्हें बताने का मेरा कोई इरादा नहीं है। चूंकि मैं अगर किसी के साथ सेक्स कर रही हूं यह जानने की उन्हें कोई ज़रूरत नहीं हैं।

सेक्स ज़िंदगी की ज़रूरत है 

मैं दोनों ओर से सोचती हूं। मुझे नहीं लगता कि उनको बताना मुझे पसंद आएगा लेकिन मुझे लगता है कि उन्हें कहना अच्छी बात है। मनुष्यों की खाना खाने और सोने के अलावा और भी ज़़रूरतें होती हैं, जिन्हें पूरा करना ज़रूरी है। मेरे परिवार को यह बात बताने में मुझे कोई आपत्ति नहीं है। मुझे पता है कि यह बात उन्हें हज़म नहीं होगी। चूंकि वह मुझे शादी की/ घर में बंद रखने की धमकी दे सकते हैं इसलिए उन्हें नहीं बताना ही बेहतर होगा। मैं उन्हें बताना चाहूंगी लेकिन वह समझेंगे नहीं।

क्या आप और आपके किसी परिवार वाले ने कभी “वह बातचीत” की है?

वह मतलब आपकी यौन ज़िंदगी के बारे में या फिर सिर्फ सेक्स के बारे में। हां, जब मैं 7वीं कक्षा में थी तब मैंने सेक्स के बारे में बात की थी लेकिन अब मैं 32 साल की हूं। तब मेरी माँ को पता चला कि मैं अक्सर सेक्स करती थी। जब 29 साल की उम्र में मैं मेरे (अब पुराने) बॉयफ्रेंड को खुलकर डेट करने लगी। उसने और कुछ जानना नहीं चाहा इसलिए मैंने कोई जानकारी नहीं दी लेकिन इससे उसे कोई दिक्कत नहीं थी। मैं सभी लिंगों की ओर आकर्षित हूं और मेरा तब का बॉयफ्रेंड भी उसी तरह आकर्षित था। मेरी माँ को मेरे बारे में यह बात कैसे पता चली, यह तो और भी रोचक किस्सा है। 

एक दिन आम बात करते समय मेरी माँ ने कुछ यूं कहा कि द्विलिंगी लोग अप्राकृतिक होते हैं। मैं मेरी माँ के बहुत करीब हूं लेकिन उसकी इस बात से मेरे मन में कुछ खटका और मैंने कहा,

क्या तुमने अभी-अभी कहा कि द्विलिंगी लोग अप्राकृतिक होते हैं? फिर तुम्हें यह जानना ज़रूरी है कि मैं और मेरा बॉयफ्रेंड पुरुष और स्त्री दोनों को डेट करते हैं और कभी-कभी हम दोनों को एक साथ डेट करते हैं। चूंकि हम एक से ज़्यादा शख्स के साथ एक ही समय पर संबंध रखते हैं, जो हमें नैतिक रूप से स्वीकार हैं।

(मैंने उसे ऐसे आचरण के नियम भी समझाए)।

लैंगिकता का खुलासा और पीएचडी 

चुपचाप इतनी सारी जानकारी हज़म करने में उसे वक्त लगा और फिर वह बोली,

ठीक है, सच कहो तो मुझे यह समझ में नहीं आया है लेकिन मुझे तुम पर विश्वास है। तुम एक अच्छी लड़की हो और तुम्हें पता है कि तुम क्या कर रही हो लेकिन अगर तुम इतने सारे लोगों के साथ एक साथ इतना सारा इश्क-विश्क करोगी तो तुम अपनी पढ़ाई पर ध्यान कब दोगी?

हा हा हा हा, यह बड़ा अनीतिपूर्ण वार था। मैं पीएचडी की छात्रा हूं और थोड़े ही दिनों में वह खत्म करने वाली हूं। मैंने कभी सोचा भी नहीं था कि मेरी माँ यूं पासा पलट देगी और वह मेरे लैंगिकता के बारे में किए हुए खुलासे को भी मेरे समय पर पीएचडी खत्म करने के साथ जोड़ देगी।

(एजेंट्स: अरे भई, यह भारतीय माता-पिता हैं, इनसे तुम्हारी क्या उम्मीद थी?)

मेरी माँ ने मनुष्यों के शरीर के बारे में बताया 

मेरी प्रौढ़ ज़िंदगी में तो किसी ने बात नहीं की। जब मैं बच्ची थी तब मेरी माँ हाथ में विश्वकोश लेकर शैक्षणिक तरीके से मुझे सेक्स और मनुष्य के शरीर के बारे में बताती थी। शायद जब से मैं 10 साल की थी तब से लेकर 12/13 साल की उम्र तक। मेरी ज़िंदगी में सेक्स से वास्तविकता होने के बहुत पहले। मेरी यौन ज़िंदगी के बारे में नहीं लेकिन जब मैं काफी छोटा था तब मेरे माता-पिता ने मेरे साथ सेक्स के कल्पित विषय के बारे में बात की थी। (मुख्यत: प्रजनन के लिए)। सेक्स के बारे में बात करने के सबसे निकट मेरी माँ बस तब आई जब 6ठी कक्षा में उसने मुझे रजोधर्म समझाया।

परिवार में सेक्स की यादें 

क्या आपको आपके परिवार के साथ सेक्स को लेकर कोई किस्से याद हैं, जो आप हमारे साथ बांटना चाहोगे? मज़ेदार, तकलीफदेह और मनोरंजक कहानियों का स्वागत है। मैं जिस कमरे में गया, वहां मेरे माता-पिता सेक्स कर रहे थे। उन्हें और मुझे लज्जा महसूस हुई। मैं वहां से भाग गया और हमने फिर कभी वह बात नहीं छेड़ी।

 

मेरी बहन और मेरे बीच एक समझौता है कि जब भी हम दोनों घर पर हो तब हम सेक्स एण्ड द सिटी के ऐपिसोड साथ में देखेंगे और मेरी माँ की एक विलक्षण आदत है कि जब भी स्क्रीन पर दो लोग प्यार जता रहे हो या जब भी नंगापन हो तब हर बार वह कमरे में आती हैं। हम दोनों में यह मज़ाक बन गया है। इसके अलावा और कोई किस्सा नहीं है।

कंडोम पहनने की असफल कोशिश 

मेरा बॉयफ्रेंड मेरे घर रहने आया था और हम शाम को बाहर जाने की तैयारी में थे। हमने उससे पहले थोड़ा बहुत सेक्स किया था और कंडोम पहनने की कुछ असफल कोशिशें भी की (हम दोनों को इतना तजु़र्बा नहीं था) और बाहर निकलने की जल्दी में हमने कंडोम से भरी प्लास्टिक की थैली रसोई घर के बाहर वाले कॉफी की मेज़ पर रख दी।

हम रातभर बाहर रहे और उस थैली के बारे में पूरी तरह से भूल गए। हम उस रात घर नहीं लौटे और अगली सुबह अचानक हमें याद आया। मैंने मेरी माँ को बुलाया और बरामदे में रखे उस पैकेट के बारे में पूछा और मुझे उसकी हंसी सुनाई दी। कुछ ऐसी जैसे उसे सब पता है और फिर उसने मुझसे कहा कि उसने वह पैकेट फेंक दिया था। बाद में जब हमने उस वाकये के बारे में और लंबी बात की तब उसने मुझे कहा कि कैसे वह उतने सारे कंडोम देखकर आश्चर्यचकित थी।

सुहागरात में चीखना मना था 

मेरी माँ ने एक दफे अपनी सुहागरात के बारे में बताया था। उसने कहा कि कैसे वह बहुत डरी हुई थी और चीज़ों के बारे में अंजान थी। उस समय की उसकी पक्की सहेली ने उसे ऊंची आवाज़ ना निकालने की चेतावनी दी थी, क्योंकि उसके परिवार वाले सब साथ रहते थे। मैं सोच भी नहीं सकती उस पर क्या गुज़री होगी लेकिन उसने मुझे यह आश्वासन दिया कि मेरे पिता बहुत समर्थक और समझदार थे।

इंटरकोर्स नहीं कॉयटस कहो 

मेरी माँ ने एक दफा मुझसे पूछा था,

क्या तुमने इंटरकोर्स किया है?

मेरा उत्तर था,

माँ, उसे इंटरकोर्स कौन बुलाता है। तुम उसे कॉयटस ही बुला लो। एक बार मेरे पिता ने शेखस्पीयर पर एकदम घटिया श्लेशालंकार किया (सेक्स और पैर [नाशपाती])। मेरी माँ उस वाकये से बहुत नाराज़ हुई।

घर पर सेक्स के बारे में बात करना वर्जित है

टीवी कई बार वह माध्यम रहा है, जिसकी वजह से एक नाज़ुक चुप्पी छा जाती है या फिर चैनल बदलने के लिए भागदौड़ मचती है। खासकर तब जब मेरे पिता कमरे में होते हैं। अब 27 साल की उम्र में मेरे पिता के साथ अंग्रेज़ी फिल्म देखना आसान हो गया है, तो यह थे कुछ नमूने उन विभिन्न तरीकों के जिनके ज़रिये लोगों ने स्वीकार किया है (या नहीं किया) कि उनके परिवार वाले कामुक रूप से कार्यरत हैं। क्या आपको लगता है कि आपकी कहानी वहां शामिल हो सकती है? क्या आपकी कहानियां अलग हैं? वह हमारे साथ बांटिए। आप किसी के साथ सेक्स कर रहे हो, यह बात किसी को कैसे बताएं। इसके बारे में क्या आप सलाह चाहते हो? आपको सलाह इधर मिलेगी।

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चित्रण: सुमित कुमार

अनुवाद: मिहीर सासवडकर

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A former Assistant Secretary with the Ministry of Women and Child Development in West Bengal for three months, Lakshmi Bhavya has been championing the cause of menstrual hygiene in her district. By associating herself with the Lalana Campaign, a holistic menstrual hygiene awareness campaign which is conducted by the Anahat NGO, Lakshmi has been slowly breaking taboos when it comes to periods and menstrual hygiene.

A Gender Rights Activist working with the tribal and marginalized communities in india, Srilekha is a PhD scholar working on understanding body and sexuality among tribal girls, to fill the gaps in research around indigenous women and their stories. Srilekha has worked extensively at the grassroots level with community based organisations, through several advocacy initiatives around Gender, Mental Health, Menstrual Hygiene and Sexual and Reproductive Health Rights (SRHR) for the indigenous in Jharkhand, over the last 6 years.

Srilekha has also contributed to sustainable livelihood projects and legal aid programs for survivors of sex trafficking. She has been conducting research based programs on maternal health, mental health, gender based violence, sex and sexuality. Her interest lies in conducting workshops for young people on life skills, feminism, gender and sexuality, trauma, resilience and interpersonal relationships.

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