मध्यप्रदेश के सिंगरौली ज़िले में स्कूल बस की लापरवाही से दो बच्चों की मौत

अब वह दौर शायद खत्म हो गया है, जब स्कूलों को शिक्षा का मंदिर माना जाता था। अब स्कूल बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित भी नहीं रह गए हैं। अब शिक्षा का बाज़ारीकरण हो चुका है। आए दिन हादसों की खबरों के बीच अभिभावकों की चिताएं बढ़ रही हैं।

मध्यप्रदेश के सिंगरौली ज़िले के स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा पर खतरा साफ मंडरा रहा है। यहां के स्कूल, नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। पढ़ाई के नाम पर मनमाने ढंग से फीस वसूलने वाले ज़्यादातर विद्यालय व शिक्षण संस्थानों की बिल्डिंग मानक के अनुरूप नहीं है।

सेपिएन्ट स्कूल के दो बच्चों की दर्दनाक मौत के बाद स्कूल प्रबंधन की लापरवाही सामने आई। मध्यप्रदेश सरकार के अफसरों ने मामले में खानापूर्ति करते हुए सारा दोष ड्राइवर पर मढ़ दिया, वहीं सांसद, विधायक और सत्ताधारी पार्टी के जन-प्रतिनिधियों की चुप्पी ने इस दर्द को और भी तकलीफदेह बना दिया है।

क्या था मामला?

28 अगस्त दोपहर मोरवा थाना क्षेत्र के खनहना में स्थित सेपिएन्ट स्कूल में अध्ययनरत दो मासूमों की स्कूल बस के नीचे आ जाने से दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा स्कूल की छुट्टी के समय करीब 1:45 बजे हुआ। स्कूल में अध्ययनरत 12 वर्षीय छात्र आदित्य श्रीवास्तव एवं 10 वर्षीय छात्रा अदिति श्रीवास्तव अपने मामा अविनाश कुमार के साथ घर जाने के लिए मोटरसाइकिल पर बैठे ही थे कि स्कूल द्वारा संचालित बस की चपेट में आ गए।

प्रतीकात्मक तस्वीर
फोटो साभार- Getty Images

बताया जाता है कि स्कूल बस का ड्राइवर धर्मेंद्र बिना पीछे देखे व खलासी को बताए तेज़ी से बस बैक कर रहा था, जिससे मोटरसाइकिल पर बैठे दोनों बच्चों व चालक को रौंदते हुए बस आगे निकल गई।

घटना के बाद स्कूल परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आनन-फानन में लोगों द्वारा तीनों को बस से केंद्रीय चिकित्सालय लाया गया, जहां डॉक्टरों ने दोनों बच्चों को मृत घोषित कर दिया। मोटरसाइकिल चला रहे बच्चों के मामा को मामूली चोटें आई। 

स्कूल प्रबंधन की लापरवाही

मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश सीमा पर एकांत में बनाए गए सेपिएन्ट स्कूल के प्रबंधन की बड़ी लापरवाही सामने आई है। बताया जाता है कि अनुभवी चालक को छोड़कर नए चालक और मूक-बधिर खलासी के हाथ में स्कूल बस की कमान सौंप दी गई थी। इसका खामियाज़ा एक ही घर के दो मासूम बच्चों को अपनी जान दे कर चुकानी पड़ी।

ठोस कार्रवाई ना होना दुःखद

मध्यप्रदेश के सिंगरौली ज़िले में लगभग आधे शिक्षण संस्थानों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से राजनीतिक नेताओं का संरक्षण मिला हुआ है। इनमें से अधिकतर संस्थानों के मालिक किसी ना किसी दल के साथ जुड़े हुए हैं। यही कारण है कि स्कूलों में बच्चों के साथ हादसा होने पर भी कोई कार्रवाई नहीं हो पाती है।

ज़िले के कलेक्टर के.वी.एस. चौधरी एवं एसपी अभिजीत रंजन द्वारा अधिनस्थ अधिकारियों की आवश्यक बैठक बुलाई गई। बैठक में केंद्र सरकार द्वारा स्कूल बस संचालन परिचालन को लेकर जारी निर्देशों का पालन करने के सख्त आदेश दिए गए।

सवाल यह है कि क्या प्रशासन द्वारा किए गए इन प्रयासों से इस दिशा में सकारात्मकता आएगी? क्या यही इंसाफ है? जिन अधिकारियों ने मानक के अनुरूप नहीं चलने वाले स्कूलों को मान्यता दी है, क्या उनकी जांच नहीं होनी चाहिए? क्या खलासी और ड्राइवर ही दोषी हैं, स्कूल प्रबंधन नहीं?

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