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पोल: क्या पाकिस्तान से भारत की तुलना ज़रूरी है?

हाल के दिनों में भारतीय अर्थव्यवस्था एवं तकनीकी संसाधन को दुनिया में कई परिवर्तनों का सामना करना पड़ा है, जिसके परिणामस्वरुप परिस्थितियां कभी सर्वोच्च तो कभी साधारण रही हैं।

जहां जीडीपी में हुई भारी गिरावट से भारतीय अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल मच गया, वहीं चंद्र अभियान का पूर्ण सफल ना होना और कार कंपनियों की मंदी जैसी खबरें इन दिनों चर्चा का विषय बनी रही। इन सभी विषयों पर मीडिया ने कई चर्चाएं आयोजित की, किन्तु इन सभी चर्चाओं के बीच देशभक्ति हावी रहा।

 हर मुद्दे को देशभक्ति से जोड़ने की आदत

यह बहुत ही निराशाजनक बात है कि हम अपने मुख्य बिंदु से हट कर देशभक्ति पर आ जाते हैं। खासकर तब जब उन चर्चाओं में पाकिस्तान से तुलना शुरू हो जाती है। वह देश जो 1947 में भारत से विभक्त हो गया था जिसकी स्थिति के बारे में हम ठीक – ठाक तौर पर नहीं जानते, वह देश हमेशा तुलना का विषय बन जाता है और मुख्य मुद्दे कहीं से कहीं पहुंच जाते हैं।

वागा बॉर्डर, फोटो क्रेडिट- Getty Images

अभी हाल के दिनों में जब भारत देश की जीडीपी में गिरावट हुई तो लोग उस विशेष तथ्य को छोड़कर यह कहने में व्यस्त थे कि हमारी जीडीपी पाकिस्तान से बेहतर है। जब रुपया डॉलर के मुकाबले काफी गिर गया था, तब भी लोग इसी मत पर बात करते नज़र आ रहे थे कि हमारी स्थिति पाकिस्तान से बेहतर है।

जब हम कोई खेल जीत जाते हैं तो पाकिस्तान से तुलना कर देते है। व्यापार, खेल, अर्थ, विज्ञान इत्यादि को भी विषय जब देश में कमज़ो स्थिति में होता है तो बजाय उसके समाधान के हम पाकिस्तान से तुलना करने में लग जाते हैं। ना जाने हमारी ऐसी कौन सी मजबूरी होती है जो हम हर बात पर पाकिस्तान से तुलना करने में पीछे नहीं रहते हैं।

समस्या के निवारण के लिए कदम

यह एक ऐसा मत है जहां देश कि प्रगति एवं विकास पर रोक लग जाती है जब हम अपने से कमजोर (पाकिस्तान) से तुलना करने में व्यस्त रहते है मुख्य बिंदु को भुलाकर अजीबोगरीब राष्ट्रीयता में जुट जाते हैं। इसका परिणाम देशहित को भटकने के अलावा और कुछ नहीं रह जाता है समस्या जस कि तस पड़ी रहती है।

सके लिए आवश्यक है कि यह झूठी राष्ट्रीयता अथवा पाकिस्तान से तुलना छोड़ प्रमुख समस्यों के निवारण हेतु कदम उठाने की आवश्यकता है अर्थात देश कि स्थिति क्या है और समस्या क्या है यह जान के उनके विषयों पर मीडिया में समाधान निकलना चाहिए ना कि मुद्दे को दूसरा स्वरूप देना चाहिए। अगर सही और उचित समाधान की बात होती है, तभी आपकी चर्चा अथवा सोशल मीडिया सन्देश सफल माना जाता है।

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