सुप्रीम कोर्ट ने आरे में पेड़ों की कटाई पर लगाई रोक, जानिए अब तक क्या-क्या हुआ

मुंबई के आरे में शुक्रवार देर सात से शुरू की गई पेड़ों की कटाई को बचाने के लिए स्टूडेंट्स द्वारा दायर की गई याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल पेड़ों की कटाई पर रोक लगा दी है। गौरतलब है कि मामले की सुनवाई को सुप्रीम कोर्ट ने 21 अक्टूबर तक टाल दी है। इसके अलावा कोर्ट ने यह भी आदेश दिया है कि इस दौरान जितने भी लोगों को हिरातस में लिया गया है, उन्हें तुरन्त रिहा किया जाए। आइए जानते हैं इस पूरे मामले में अब तक क्या-क्या हुआ-

  • देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई से पहले पिछले एक सप्ताह से पर्यावरणविद और तमाम प्रदर्शनकारी सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे थे।
  • इस दौरान कई प्रदर्शनकारियों को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया। उल्लेखनीय है कि मुंबई हाईकोर्ट की तरफ से 2646 पेड़ों को काटने की इजाज़त मिली थी।
  • हाईकोर्ट ने जैसे ही पेड़ काटने की इजाज़त दे दी, शुक्रवार देर रात से सुरक्षाबलों की भारी तैनाती के बीच धड़ल्ले से पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई।
  • मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक 2000 से अधिक पेड़ काटे जा चुके हैं। इस दौरान कुछ स्टूडेंट्स ने आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली, जिसके बाद चीफ जस्टिस रंजन गोगई ने मामले की सुनवाई के लिए स्पेशल बेंच के गठन का निर्णय लिया।
  • मुंबई के आरे कॉलोनी के आसपास अभी भी धारा 144 लागू है। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद बोरिवली हॉलिडे कोर्ट ने गिरफ्तार किए गए 29 प्रदर्शनकारियों को 7000 के मुचलके पर रिहा करने की इजाज़त दी।
  • आपको बता दें कि मुबई मेट्रो की ओर से यह दावा किय गया है कि मुंबई में लगभग 24000 पेड़ लगाए गए हैं, जिनका लगातार ध्यान रखा जा रहा है।
  • उल्लेखनीय है कि स्टूडेंट्स की ओर से सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े, महाराष्ट्र सरकार की ओर से तुषार मेहता और मुंबई मेट्रो की ओर से मनिंदर सिंह हैं।
  • कोर्ट में जैसे ही आज आरे मसले पर सुनवाई शुरू हुई, तब चीफ जस्टिस ने याचिकाकर्ताओं  से पूछा कि क्या हम सभी याचिकाओं की सुनवाई करें या किसी एक याचिका की जिसमें सभी मसले हो।
  • आपको बता दें सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि पहले इस मामले को चेक किया जाएगा। अगर एक प्रतिशत भी गलत पाया गया तो उसे गलत ही माना जाएगा।
  • सुनवाई के बाद स्टूडेंट्स की ओर से वरिष्ठ वकील संजय हेगड़े ने मीडिया को बताया, “सॉलिसिटर जनरल ने अदालत में कहा है कि मेट्रो को जितने पेड़ काटने थे उतने काट लिए गए हैं।”
  • मालूम हो कि कोर्ट ने आरे में निर्माण कार्य पर रोक नहीं लगाई है। सिर्फ पेड़ों की कटाई पर रोक है।

पेड़ों की कटाई का मसला क्या है?

गौरतलब है कि पिछले कुछ वर्षों से मुंबई में मेट्रो के विस्तार का कार्य जारी है, जिसके तहत साल 2014 में शुरू हुए मेट्रो प्रोजेक्ट का पहला फेज़ वर्सोवा से लेकर घाटकोपर तक पूरा हो चुका है। जैसे-जैसे मेट्रो का विस्तार शुरू हुआ, वैसे-वैसे मुंबई मेट्रो को पार्किंग के लिए शेड की ज़रूरत पड़ी। मेट्रो निर्माण कंपनी ने जब मुंबई के निरीक्षण की शुरुआत की तब उन्हें पार्किंग शेड के तौर पर आरे ही एकमात्र जगह मिली।

पहली तस्वीर में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेती पुलिस और दूसरी तस्वीर में पेड़ों की कटाई पर दुख प्रकट करते तमाम पर्यावरण प्रेमी। फोटो साभार- Twitter

अगस्त 2019 में मुंबई मेट्रो रेल कॉरपोरेशन ने बीएमसी के सामने मेट्रो शेड निर्माण के लिए प्रस्ताव रखा था। प्रस्ताव में कहा गया था कि मेट्रो शेड निर्माण कार्य के लिए आरे में कुछ पेड़ों को काटे जाने की ज़रूरत है। अभी एक सप्ताह पहले ही बीएमसी ने पेड़ों के काटे जाने की मंज़ूरी दे दी थी।

मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के प्रस्ताव की माने तो कुल 2702 पेड़ों में से 2238 पेड़ काटे जाने थे और बाकी बचे पेड़ों को दूसरी जगह शिफ्ट किया जाना था।

फिल्मी हस्तियों ने भी किया विरोध

रात के अंधेरे में आरे में पेड़ों की कटाई शुरू होने के बाद एक तरफ तमाम पर्यावणविद और स्टूडेंट्स सड़कों पर थे, तो वहीं दूसरी ओर फिल्मी हस्तियों ने भी सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर के ज़रिये इसका पुरज़ोर विरोध किया।

रवीना टंडन, रणदीप हुडा, दिया मिर्ज़ा और अमिताभ बच्चन समेत कई दिग्गज कलाकारों ने अपने-अपने स्तर पर विरोध प्रकट किया। फिल्मी हस्तियों द्वारा इस मुहिम में शामिल होने के बाद उनके फैंस भी बढ़ चढ़कर इस मुहिम का हिस्सा बने।

देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने आरे कॉलोनी की नींव रखी थी। सन् 1951 में मुंबई में डेयरी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए पंडित नेहरू ने आरे मिल्क कॉलोनी की शुरुआत करते हुए यहां पौधारोपण किया था।

नेहरू के पौधारोपण के बाद उनसे प्रेरित होकर आम लोगों ने भी पेड़ लगाना शुरू कर दिया और देखते ही देखते इस इलाके ने घने जंगल का रूप ले लिया। यह पूरा इलाका 3166 एकड़ में फैला हुआ है, जिसके चारो तरफ सिर्फ हरियाली ही नज़र आती है।

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