दुनिया के 11 हज़ार वैज्ञानिकों ने घोषित की ग्लो‍बल क्लाइमेट इमरजेंसी

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ग्‍लोबल वॉर्मिंग को लेकर अब जो खबर आ रही है, वह वाकई इस दुनिया में रहने वालो वाले इंसानों को बेचैन करने के लिए काफी है। दुनिया भर के 152 देशों के 11,000 से अधिक वैज्ञानिकों ने ग्‍लोबल वॉर्मिंग को लेकर एक रिपोर्ट तैयार की है।

इस रिर्पोट में इन वैज्ञानिकों ने पृथ्वी पर ग्‍लोबल वॉर्मिंग की वजह से पड़ने वाले प्रभावों की वजह से ग्‍लोबल क्‍लाइमेट इमरजेंसी डिक्‍लेयर कर दी है। इन वैजानिकों के अनुसार पूरी दुनिया इस वक्‍त ग्‍लोबल वॉर्मिंग की चपेट में है।

वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर पर्यावरण के ऊपर प्रदूषण की वजह से पड़ने वाले प्रभावों को लेकर कुछ महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाये, तो आने वाले समय में बेहद गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है।

इन वैज्ञानिकों ने ग्‍लोबल वॉर्मिंग का ज़िम्‍मेदार ग्रीन हाउस गैस उत्‍सर्जन, नेचर को नज़रअंदाज़ करके होने वाला अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्‍यापार और जनसंख्‍या विस्‍फोट को माना है। दुनिया भर का ध्‍यान पर्यावरण की तरफ खींचने वाले इन वैज्ञानिकों ने ग्‍लोबल वॉर्मिंग को रोकने के कुछ उपाय भी सुझाए हैं।

ग्‍लोबल वॉर्मिंग के गंभीर खतरों को लेकर सचेत करने वाली यह रिपोर्ट बायो साइंस नामक जर्नल में छपी है और बिल रिप्पल नाम के इकॉलाजिस्‍ट इस रिपोर्ट को दुनिया के सामने लेकर आए हैं।

प्रदूषण।
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो साभार- Flickr

ग्‍लोबल वॉर्मिंग को लेकर अभी हाल ही में संयुक्‍त राष्‍ट्र में जो बैठक हुई थी, यह रिपोर्ट उससे काफी अलग है। संयुक्‍त राष्‍ट्र की बैठक में ग्‍लोबल वॉर्मिग रोकने के लिए जो रोडमैप बताया गया था, वह काफी अनिश्चितताओं से भरा हुआ था लेकिन इस रिपोर्ट में ऐसा नहीं है।

दुनियाभर के लोगों को पर्यावरण को लेकर सचेत करने वाले ये वैज्ञानिक ग्‍लोबल वॉर्मिंग का प्रमुख कारण ग्रीन हाउस गैसों के उत्‍सर्जन को मान रहे हैं। पिछले 40 वर्षों में दुनिया के ऊपर ग्रीन हाउस गैसों का काफी बुरा असर पड़ा है।

यह रिर्पोट दुनिया भर के लोगों को यह सुझाव देती है कि दुनिया की तमाम सरकारें आपसी सहयोग की मदद से कुछ ऐसी पॉलिसी बनाये जिससे ग्रीन हाउस गैसों का कम उत्‍सर्जन हो।

इसके अलावा इस रिपोर्ट में कई ऐसे सुझाव दिए गए हैं, जिन्हें ध्‍यान में रखकर दुनियाभर के देश अपने-अपने देशों में पॉलिसीज़ बनाये तो काफी बड़ी मात्रा में ग्‍लोबल वॉर्मिंग की वजह से दुनिया पर पड़ने वाले नकारात्‍मक प्रभावों को कम किया जा सकता है।

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