“महिलाओं के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाला अमेज़न का फेक ब्लड कैप्सूल”

कुछ दिनों से फेसबुक पर एक विरोध ट्रेंड कर रहा है। मसला यह है कि ‘फेक वर्जिनिटी’ के संदर्भ में अमेज़न कंपनी ‘फेक ब्लड कैप्सूल’ या इसी तरह के कुछ उत्पाद बेच रही है। जो महिलाएं ‘वर्जिन’ नहीं हैं, वे विवाह के वक्त ऐसे उत्पादों का इस्तेमाल कर अपनी पवित्रता बनाए रख सकती हैं।

वर्जिनिटी को हमेशा से औरतों की पवित्रता के साथ जोड़कर देखा गया है जबकि अफ्रीका के कबिलाई समाज में महिलाओं की वर्जिनिटी को सुरक्षित रखने के लिए ‘खतना मासिक धर्म’ शुरू होते ही उसे खतना करके सील कर दिया जाता था, जो उसकी शादी से ठीक पहले हटाया जाता था।

खतना की प्रक्रिया में घर में काम करने वाली दाई की बड़ी अहम भूमिका होती है, जिसे लोग आज भी बेहद खतरनाक और अमानवीय प्रथा के तौर पर जानते हैं। ना सिर्फ अफ्रीका में बल्कि दुनिया भर में कई जगहों पर ऐसी चीज़ें होती हैं।

सन् 1988 में प्रसिद्ध मार्क्सवादी विचारक एंगेल्स ने अपनी किताब “परिवार, निजी सम्पति या राज्य की उत्पत्ति” में स्त्री की अधीनता के इतिहास को रेखांकित किया था। उन्होंने लिखा था,

प्रागैतिहासिक काल में यौन संबंधों में कोई नियंत्रण नहीं था। प्रत्येक स्त्री का प्रत्येक पुरूष से यौन संबंध हो सकता था। धीरे-धीरे एक कबीले की स्त्रियों का दूसरे कबिले के पुरुषों से सामूहिक विवाह होने लगा। तब तक समाज मातृसत्तात्मक थी फिर संबंधियों के बीच वर्जना बढ़ने के साथ-साथ हर प्रकार का सामूहिक विवाह असम्भव सा हो गया।

उन्होंने आगे लिखा, “वैवाहिक संबंध दो कबीलों के बीच में ना होकर दो व्यक्तियों के बीच स्थापित होने लगा। आगे चलकर खरीदकर या अगुआ द्वारा शादी तय करने का रिवाज़ प्रचलित हो गया। इस तरह से एक स्त्री पर एक ही पुरूष का आधिपत्य स्थापित हो गया।”

यह आधिपत्य ही है जिसने औरतों की वर्जिनिटी को परखने के लिए ऐसे दकियानूसी तरीके का सहारा ले लिया है, जिससे शादी के बाद पहली बार संबंध बनाते समय खून के गिरने से तय किया जाता है कि वह इमानदार या पवित्र है या नहीं?

लोगों की मानसिकता के हिसाब से बाज़ार भी ट्रेंड सेट करता रहता है। पहले गोरा रंग करने के लिए क्रिम, पाउडर, फेशवॉस और साबुन तक ही सीमित था फिर पतला करके छरहड़ी शरीर पाने के नाम पर दवाइयां उपलब्ध हुईं और अब तो फर्स्ट नाइट में फर्स्ट सेक्स का एक्सपीरियंस मिले इसके लिए भी दवाइयां बिकने लगी हैं।

ये उत्पाद सिर्फ महिलाओं के स्वाभिमान को ही नहीं ठेस पहुंचा रही है, बल्कि प्राकृतिक रूप से मिले शरीर के साथ अनावश्यक छेड़छाड़ कर बीमार भी कर रही है। इसका बहिष्कार करते हुए अमेज़न जैसी घटिया बिज़नेस माइंडेड मार्केटिंग साइट को अपना संदेश दिया जा सकता है।

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