क्या आपको इन ट्रैफिक लाइटों और सिग्नलों का मतलब पता है?

भारत में हर घंटे 17 लोग रोड एक्सीडेंट में अपनी जान गंवाते हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग हो या नगरीय व ग्रामीण सीमा के अंदर वाले क्षेत्र, सभी मार्गों पर सुरक्षित ड्राइव करने के लिए भारत सरकार ने यातायात के कुछ नियम बनाए हैं, जिनका पालन करके हम रोड पर सुरक्षित यात्रा कर सकते हैं।

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फोटो प्रतीकात्मक है। फोट साभार- Getty Images

सड़कों पर आए दिन होने वाले रोड एक्सीडेंट की खबरें हम सोशल मीडिया व दैनिक समाचार पत्रों में पढ़ते रहते हैं, जिसका मुख्य कारण खराब ड्राइविंग के साथ-साथ ट्रैफिक पुलिस के संकेतों एवं यातायात नियमों को नज़रअंदाज करते हुए वाहन चलाना है।

रोज़ाना लगने वाले ट्रैफिक जाम से भी मिल सकती है मुक्ति-

आजकल अभिभावक भी उन नाबालिग बच्चों व युवाओं को दुपहिया, तीन पहिया और चार पहिया वाहन पकड़ा देते हैं, जिन्हें यातायात के नियमों का पालन करने से दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं होता। सड़कों पर स्टंट करना व तेज़ रफ्तार से वाहन चलाना महज़ इनका शौक होता है। इनके लिए भी सख्ती से कानून बनाने की ज़रूरत है। बचपन से ही बच्चों को रोड सेफ्टी के विषय में जागरूक करना चाहिए।

आज के दौर में साइकिल सवार व पैदल राहगीरों के लिए भी अलग से ट्रेक की व्यवस्था होनी चाहिए। यदि हम यातायात के नियमों का स्वयं पालन करते हुए अन्य वाहन चालकों को भी जागरूक करें, तो शायद रोज़ाना होने वाली दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम की समस्या से बहुत ही आसानी से मुक्ति पा सकते हैं।

सड़क सुरक्षा के कुछ ज़रूरी नियम-

व्यवस्थित वाहन पार्किंग-

ट्रैफिक जाम की समस्या का मुख्य कारण वाहन चालकों द्वारा गलत तरीके से अपने वाहन की पार्किंग करना है। अपने वाहनों की पार्किंग करते समय हमें इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि वाहन हमेशा ऐसे स्थान पर खड़ा करें कि वह दूसरों के लिए मुसीबत ना बन जाए और ना ही ट्रैफिक जाम की स्थिति पैदा करे।

नियमानुसार सुरक्षित ड्राइविंग-

सदैव ट्रैफिक पुलिस के नियम व सिग्नल को ध्यान में रखते हुए ही वाहन को ड्राइव करना चाहिए। सुरक्षित सफर के लिए ज़रूरी है कि कभी भी किसी से प्रतिस्पर्धा करते हुए वाहन को तेज़ गति से नहीं चलाना चाहिए और ना ही गलत तरीके से अन्य वाहन को ओवर टेक करना चाहिए। साथ ही वाहन चालक को इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि यदि नींद के झोंके आ रहे हों तो वाहन नहीं चलाना चाहिए।

ध्वनि प्रदूषण नियंत्रण-

ज़्यादातर ट्रैफिक जाम की स्थिति में कुछ वाहन चालक अनावश्यक हॉर्न बजाते हैं, जिससे आसपास के वातावरण में ध्वनि प्रदूषण उत्पन्न होता है, इससे अन्य राहगीर भी परेशान हो जाते हैं। बेहतर होगा कि वाहन चालक हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि कभी भी जल्दबाज़ी के चक्कर में अनावश्यक हॉर्न का प्रयोग ना करें, बल्कि थोड़ा सा इंतज़ार करें और सामने वाले को निकलने का पूरा अवसर प्रदान करें।

एक तरफा रोड-

यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के लिए दिशा निर्देश जारी किए गए हैं, इसी के अंतर्गत जब आप एक तरफा रोड में होते हैं, तो उसका अनुसरण करना चाहिए। यह कुछ दूरी और वाहन चालकों की सुविधा के लिए ही होता है। अगर कोई अपना समय बचाने की दृष्टि से गलत साइड में चलता है तो वह अपने साथ-साथ दूसरों का भी समय खराब करता है।

लेन अनुशासन का पालन करना-

वाहन चलाते समय अनुशासन का भी विशेष महत्व होता है, अक्सर अनुशासनहीनता के कारण ही लोग दुर्घटनाओं और ट्रैफिक जाम का शिकार हो जाते हैं। आप यदि किसी लेन में चल रहे हों, तो उसे ही फॉलो करना चाहिए। अगर कोई व्यक्ति अपने समय को बचाने की दृष्टि से लेन को तोड़ता है, तो वह अन्य वाहन चालकों के साथ यातायात व्यवस्था को भी प्रभावित करता है।

हाथ सिग्नल या इंडिकेटर का प्रयोग-

वाहन चलाते समय किसी भी मोड़ पर जाने से पहले इंडिकेटर या हाथ के सिग्नल का प्रयोग करना चाहिए, जिससे आपके पीछे चल रहा व्यक्ति आपके साइड को समझकर सुरक्षित ड्राइविंग कर सके।

ट्रैफिक नियमों का पालन करने के लिए कुछ ज़रूरी संकेतों को जानते हैं-

फोटो सोर्स- pexels.com

भारत में यातायात के मुख्य तीन संकेत किसी भी शहर के मुख्य चौराहों पर लगे होते हैं। ये संकेत तीन रंगों को दर्शाते हैं, जो सिस्टम के अनुसार रंग बदलते रहते हैं।

लाल बत्ती- यातायात के मुख्य तीन संकेतों में से पहला है लाल बत्ती, जिसे रेड सिग्नल भी कहा जाता है। इसका मतलब होता है चौराहे पर कुछ देर के लिए जहां हैं वहीं रूक जाएं।

पीली बत्ती- यातायात के मुख्य तीन संकेतों में से दूसरा है पीली बत्ती, जिसे येलो सिग्नल भी कहते हैं। इसका मतलब होता है, अब चलने के लिए तैयार रहिए। अर्थात् जब आप रेड लाइट पर रूकते हैं, इसके बाद जब पीली बत्ती जलती है, तो वह आपको चलने के लिए तैयार हो जाने का संकेत देती है।

हरी बत्ती-  यातायात के मुख्य तीन संकेतों में से तीसरा है हरी बत्ती, जिसे ग्रीन सिग्नल भी कहते हैं। इसका मतलब होता है अपने गंतव्य स्थान के लिए अब प्रस्थान करें। अर्थात जब सिग्नल में हरी लाइट जलती है, तो इसका अर्थ यह है कि आपको अब यहां से चलना है।

यातायात के चिन्हों के अर्थ-

प्रवेश वर्जित है (No Entry)- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी वाहन को अंदर ले जाना पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

एक तरफा ट्रैफिक (One way traffic)- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी वाहन के अंदर आने व बाहर जाने का मार्ग अलग-अलग होता है।

दोनों दिशा में वाहन चलाना वर्जित है (Vehicles prohibited in both direction)- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी वाहन का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित रहता है।

बाईं हाथ में नहीं मुड़ना है (No left turn) – जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर बाईं हाथ की तरफ जाना पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

दाईं हाथ में नहीं मुड़ना है (No right turn )- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर दाहिने हाथ की तरफ जाना पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

नो ओवरटेकिंग (No overtaking)- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी वाहन से आगे निकलने की कोशिश करना पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

नो पार्किंग (No parking)- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी का भी वाहन खड़ा करना पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

नो स्टॉपिंग (No stopping)- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी वाहन का चलते समय रुकना पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

ट्रक वर्जित है- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी ट्रक का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

साइकिल वर्जित है- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी साइकिल जैसे वाहन का प्रवेश पूर्णतः वर्जित होते हैं।

बैल गाड़ी, तांगा या हाथ गाड़ी वर्जित है- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी बैल गाड़ी, तांगा या इस तरह की हाथ गाड़ी का प्रवेश पूर्णतः वर्जित होता है।

पैदल चलने वाले व्यक्ति वर्जित हैं- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर पैदल चलने वाले व्यक्ति का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित होते हैं।

सभी मोटर वाहन वर्जित हैं- जहां यह लिखा हुआ होता है, वहां पर किसी भी तरह के मोटर वाहन का प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित होता है।

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लेखक के बारे में- राष्ट्रीय राजमार्ग, नगर व देहात की पगडंडियों पर रोज़ाना होने वाली सड़क दुर्घटनाओं में घायलों की तत्काल मदद किए जाने और वाहन जनित प्रदूषण में कमी लाने के उद्देश्य से लेखक प्रवीन कुमार शर्मा (सचिव-जनआधार कल्याण समिति) ने जनजागृति हेतु यह लेख लिखा है। इस लेख का उद्देश्य है कि आप भी यातायात के नियमों का पालन करते हुए सदैव मानवता की सेवा के लिए तत्पर रहें। प्रत्येक भारतीय नागरिक की भी यह नैतिक ज़िम्मेदारी बनती है कि वह सरकार के साथ रोड सेफ्टी के उपाय और रोकथाम के बारे में निरंतर प्रयास करते रहें।

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