शरीर को संतुलित वजन प्रदान करने में फायदेमंद है पालेओ डाइट

सेहत और तंदरूसती एक लंबे सक्रिय और सुखद जीवन की कुंजी है लेकिन बदलते परिवेश और लाइफस्टाइल के कारण लोग अपनी सेहत का ध्यान नहीं रख पाते हैं और नतीजतन उन्हें कई तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। स्वस्थ्य जीवन शैली के लिए स्वस्थ्य आहार कितना महत्वपूर्ण है, इस बात से हम सब भली-भांति परिचित हैं। 

बदलते वक्त के साथ लोगों के लिए उनकी फिटनेस पहली प्राथमिकता बन गई है क्योंकि आज हर कोई फिट और स्लिम दिखना चाहता है। इसके लिए लोग जिम और योगा जैसी एक्टिविटीज और कई तरह के डाइट प्लान फॉलो कर रहे हैं, जिसमें से एक है पालेओ डाइट। जिसे फॉलो करके आप अपनी फिटनेस को मेन्टेन कर सकते हैं। इस डाइट से वजन को नियंत्रित करना काफी आसान हो जाता है क्योंकि आज के भागम-भाग भरी दिनचर्या में खुद को मेन्टेन रखना और अपने वजन को नियंत्रित करना भी एक चुनौती है।

क्या है पालेओ डाइट?

पालेओ डाइट का मतलब उन खाद्य पदार्थों के सेवन से है, जो पाषाण काल (Paleolithic Age) में उपलब्ध थे, जिसका सेवन उस समय के हमारे पूर्वज किया करते थे। यह एक ऐसी डाइट है, जिसमें प्रोसेस्ड फूड जैसे- ब्रेड, डेरी प्रोडक्ट्स और खेती के ज़रिए उगाने वाले अनाज लेगुम्स, बीन और शुगर नहीं खाए जाते हैं क्योंकि इन चीज़ों को बनाने में टेक्नोलॉजी की ज़रूरत होती है। इसके जगह फल और सब्जियों का अधिक सेवन किया जाता है।

पालेओ डाइट
पालेओ डाइट। फोटो साभार- Flickr

जानकारों के अनुसार पालेओ डाइट के कारण ही पहले लोगों में मोटापा, मधुमेह और हृदय रोग जैसी जानलेवा बीमारियां बहुत कम देखने को मिलती थी। यह खाद्य पदार्थ भुख हार्मोन और ब्लड में शुगर की मात्रा को संतुलित रखते हैं।

पालेओ आहार शरीर में उर्जा का स्टार बढ़ाता है, वजन को नियंत्रित रखता है और इसके साथ ही हमारे मानसिक स्वास्थ्य में भी सुधार करता है।

पालेओ डाइट फाॅलो करने की वजह-

पालेओ डाइट का मुख्य उद्देश्य यह है कि हम अपने आहार में प्राकृतिक और पौष्टिक खाद्य पदार्थों को अधिक-से-अधिक शामिल करें। पालेओ डाइट हर मौसम के लिए उपयुक्त माना जाता है। इसमें मौजुद सभी खाद्य पदार्थ उर्जा का बेहतर स्रोत हैं। कोई अगर दृढ़ता से इस आहार को फॉलो करे तो उसे एनर्जी के लिए किसी भी एनर्जी ड्रिंक की ज़रूरत महसूस नहीं होगी।

क्या खाएं-

आमतौर पर सभी सब्जियां खाई जा सकती हैं क्योंकि यह प्राकृतिक सोर्स से मिलती हैं। जैसे- चुकंदर, गाजर, शिमला मिर्च, गोभी, पालक, बैंगन, ब्रोकली, शतावरी, आलू और मीठा आलू।

इसके अलावा हर तरह के फल भी खाए जा सकते हैं, जो विटामिन और एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर हो क्योंकि एंटी-ऑक्सीडेंटस हमारे शरीर से विशुद्ध पदार्थों को बाहर निकालने का काम करते हैं। हालांकि अगर आप वजन कम करने की ओर बढ़ रहे हैं तो ध्यान रखें उस समय आप केला ना खाएं क्योंकि इसमें शुगर और कार्बोहायड्रेट की मात्रा बहुत ज्यादा होती है। आप यह फल खा सकते हैं, जैसे- सेब, नारंगी, आम, अनानस, लीची, अंगूर, पपीता, अमरुद और तरबूज आदि फल खाए जा सकते हैं।

पालेओ डाइट बिना मांसाहार के पूर्ण नहीं हो सकता क्योंकि उस समय के हमारे पूर्वज अपने पोषण के लिए मूलतः मांस पर ही निर्भर थे। इसमें लीन मीट अर्थात् कम वसा वाले मांस खाए जाते हैं। साथ ही मांस को प्रोटीन का बेहतर स्रोत भी माना जाता है और यह मांसपेशियों को भी मजबुती प्रदान करता है। इस डाइट में लगभग 25-30% कैलोरी मीट के ज़रिये लेनी होती है।

इसके अलावा आप मछली भी खा सकते हैं क्योंकि मछली प्रोटीन के साथ-साथ ओमेगा 3 फैट का एक बेहतर स्त्रोत है, जो आपकी आंखों और दिल का ख्याल रखता है।

जैसा की हम सब जानते हैं कि हम भारतीयों का भोजन बिना तेल और वसा के पूर्ण नहीं होता। पालेओ डाइट में खाना पकाने के लिए आप पास्चरड बटर, एक्स्ट्रा वर्जिन ऑलिव ऑयल ( जैतून का तेल ) और नारियल तेल का इस्तेमाल कर सकते हैं।

आप अपने डाइट में ड्राई फ्रूट्स भी शामिल कर सकते हैं।

क्या नहीं खा सकते हैं?

फोटो साभार- Flickr
फोटो साभार- Flickr

चूंकि पालेओ डाइट का संबंध उन खाद्य पदार्थों के सेवन से है, जो पाषाण काल में उपलब्ध थे और उस समय खेती का कोई ज़रिया नहीं था इसलिए इस डाइट में निम्नलिखित चीज़ों का सेवन वर्जित है।

  • फसलों की फलियां (Legume and Beans) जैसे- सभी प्रकार की दाल और बीन्स. राजमा, चना, सोयाबीन, मूंगफली और मूंगदाल आदि चीज़ें खाना वर्जित है।

  • सभी प्रकार के अनाज जो खेते के माध्यम से उगाये जाते हैं, वह सब वर्जित हैं। जैसे- गेंहू, चावल, बाजरा और ओट्स आदि. साथ ही इन सब चीज़ों से बनाये जाने वाले खाद्य पदार्थ भी नहीं खाए जाते हैं।

  • सभी प्रकार के प्रोसेस्ड आइटम भी वर्जित हैं।

  • दूध और दूध से बनी चीज़ें, हालांकि दूध और दूध से बनी चीज़ें खाई जा सकती हैं या नहीं इस पर अभी रिसर्च चल रही है क्योंकि कुछ लोगों को लाक्टोज से एलर्जी होती है इसलिए भी यह अभी शोध का मुद्दा बना हुआ है।

पालेओ डाइट के फायदे-

  • कई अध्ययनों में पालेओ डाइट की तुलना अन्य डाइट प्लान से की गई। जिसमें यह निष्कर्ष सामने आया कि पालेओ डाइट में इस्तेमाल किए जाने वाले खाद्य पदार्थ निश्चित तौर पर स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हैं क्योंकि यह शरीर को आवश्यक पोषक तत्व प्रदान करते हैं।

  • पालेओ डाइट का सेवन शरीर को संतुलित वजन प्रदान करता है क्योंकि इस डाइट में सभी पोषक तत्व संतुलित मात्रा में पाए जाते हैं और अगर आपका वजन ज्यादा है, तो इस डाइट के माध्यम से उसे कम भी किया जा सकता है।

  • पालेओ डाइट शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता है, जिससे कई बीमारियां शरीर को छू भी नहीं पातीं।

  • मानसिक स्वास्थ्य को बनाये रखने में भी पालेओ डाइट की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका होती है।

  • यह डाइट हमारे आंतों को भी स्वस्थ्य रखता है और पाचन क्रिया को दुरुस्त करता है।

  • पालेओ डाइट के सेवन से आपका दिल हमेशा जवां रहता है, क्योंकि इस डाइट में केवल हेल्दी फैट का सेवन किया जाता है, जिससे शरीर में कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी नियंत्रित रहता है।

पालेओ डाइट के नुकसान-

  • चूंकि इस डाइट में दूध और दूध से बनी चीज़ें वर्जित हैं इसलिए शरीर में विटामिन-डी और कैल्शियम की कमी हो जाती है।

  • लगातार कम कार्बोहायड्रेट का सेवन करने से शरीर में किटोसिस की मात्रा बढ़ जाती है। किटोसिस वह प्रक्रिया है, जिसके माध्यम से शरीर में मौजूद वसा को तोड़कर ग्लूकोज़ का निर्माण किया जाता है।

भारत में पालेओ डाइट-

  • हम भारतीय मूलतः अनाज पर ही निर्भर होते हैं और हमारा पारंपरिक भोजन रोटी और दाल होता है, जबकि पालेओ डाइट में अनाज का सेवन नहीं किया जाता इसलिए अभी अधिकांश भारतीय इस डाइट को फॉलो नहीं करते हैं।

  • इसके साथ ही आज भी देश में अधिकांश लोग ऐसे हैं, जो शाकाहार पसंद करते हैं लेकिन पालेओ डाइट बिना मांसाहार के पूर्ण नहीं होता इसलिए अगर आप पूर्णत: शाकाहारी हैं, तो पालेओ डाइट ना फॉलो करें।

  • पालेओ डाइट अन्य डाइट के मुकाबले थोड़ा मंहगा पड़ता है और शायद इसलिए भी लोग इसे फॉलो नहीं करते।

आप भी अगर पालेओ डाइट को फॉलो करना चाहते हैं, तो बेहतर होगा कि आप पहले किसी अच्छे डायटीशियन से संपर्क करें। जिससे आपके शरीर के अनुरूप ही आप इस डाइट में खुद को ढाल सकें। धीरे-धीरे अपनी दिनचर्या को बदलते हुए आप अपनी डाइट चार्ट को फॉलो कर सकते हैं।

नोट: YKA यूज़र सौम्या ज्योत्स्ना ने सीनियर डाइटिशियन डॉक्टर. सुमीता कुमारी से बातचीत के आधार पर यह स्टोरी लिखी है।

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