अपनी समस्या के समाधान के लिए सही लीडर का चुनाव कैसे करें?

हमारे सभी मुद्दे का समाधान कोई एक इंसान नहीं कर सकता है। वजह, हर मुद्दे के समाधान के लिए अलग-अलग लोगों के पास पावर होता है। इस कारण हमें अपनी समस्या के समाधान के लिए सही व्यक्ति की पहचान बेहद ज़रूरी है।

उदाहरण के लिए मैं आपको आपके स्कूल के दिनों में लेकर चलती हूं। अब मान लीजिए आपके पास गणित का कोई सवाल है, अब विज्ञान के शिक्षक के पास जाने पर उसका हल तो निकलेगा नहीं। सवाल गणित का है तो आपको जवाब भी गणित के शिक्षक से ही मिलेगा।

अब आते हैं मुद्दे की बात पर, तो यही नियम किसी समस्या के समाधान के लिए भी लागू होगा। किसी मुद्दे का समाधान उस मुद्दे से जुड़े व्यक्ति द्वारा ही हो सकता है। गलत डिसिज़न मेकर के चुनाव से आपकी समस्या का कोई समाधान भी नहीं निकलेगा और आपका समय भी बर्बाद होगा।

अब सवाल उठता है कि फिर एक सही डिसिज़न मेकर की पहचान कैसे की जाए?

डिसिज़न मेकर के सिस्टम को समझना

सही डिसिज़न मेकर की पहचान के लिए सबसे पहले सिस्टम को समझना ज़रूरी है, मतलब आपने जिस समस्या की बात की है, उस समस्या से जुड़ा हुआ सिस्टम क्या है?

उदाहरण के तौर पर अगर आप भारत सरकार के स्ट्रक्चर की बात करें तो यहां डिसिज़न मेकर के तीन स्तर हैं- केंद्र (नैशनल लेवल), राज्य और स्थानीय प्रशासन। नैशनल लेवल के प्रशासन के अंतर्गत प्रधानमंत्री और कैबिनेट मिनिस्टर्स आते हैं। राज्य स्तरीय प्रशासन के अंतर्गत मुख्यमंत्री और राज्य विभागों के प्रमुख आएंगे, वहीं स्थानीय प्रशासन के अंतर्गत नगरपालिका और पंचायत आएंगे।

अब अगर मुद्दा नैशनल हाइवे के गड्ढों से संबंधित है, तो किस प्रशासन के पास शिकायत दर्ज की जानी चाहिए? इसके लिए केंद्र सरकार के पास शिकायत दर्ज की जा सकती है। केंद्र सरकार में भी आपको सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के पास शिकायत दर्ज करनी होगी।

लेकिन अगर आपको किसी स्थानीय इलाके की सड़क के गड्ढे की मरम्मत करवानी है तो आपको स्थानीय नगरपालिका के नेता से शिकायत करनी होगी।

अपने डिसिज़न मेकर का चुनाव करते समय ध्यान में रखने वाली महत्वपूर्ण बातें

चलिए आपको एक बार फिर स्कूल के दिनों में लेकर चलते हैं। अगर आपको अपने स्कूल के कैंटिन के बाथरूम को साफ करवाना है, तो किससे शिकायत करनी होगी? स्कूल के प्रिंसिपल से या कैंटिन के सुपरवाइज़र से?

यहां हम आपको कुछ ऐसे सवाल उदाहरण के तौर पर दे रहे हैं, जिससे आपको सही डिसिज़न मेकर के चुनाव में मदद मिलेगी।

क्या उस व्यक्ति को आपके मुद्दे से फर्क पड़ता है? अगर आपके मुद्दे से आपके द्वारा चुने गए डिसिज़न मेकर का कोई ताल्लुक नहीं है तो इसकी उम्मीद बहुत कम होगी कि वह आपके मुद्दे पर कोई एक्शन ले।

क्या आपके द्वारा चुने गए डिसिज़न मेकर के पास मुद्दे के समाधान के लिए पावर है? आपके संसदीय प्रतिनिधि (MP/MLA) के पास संबंधित मुद्दे की नीतियों में बदलाव का अधिकार नहीं होता है। मगर आपके मुद्दे को संसद में उठाने का अधिकार उनके पास होता है।

क्या आपका मुद्दा आपके द्वारा चुने गए डिसिज़न मेकर के अधिकार क्षेत्र में आता है? अगर आपको अपरेज़ल चाहिए तो आपके ऑफिस के सहकर्मी के पास यह अधिकार नहीं होगा। इसके लिए आपको अपने बॉस से संपर्क करना होगा।

माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के लिए अपने लीडर को चिन्हित करें

भारत में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन से संबंधित मसलों के समाधान के लिए कई मंत्रालय काम कर हैं। इस वेबसाइट में स्कूल, ज़िला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर माहवारी स्वच्छता से संबंधित सरकार द्वारा चलाए जा रहे सभी कार्यक्रमों और मंत्रालयों की लिस्ट दी गई है।

इन सबके अलावा, कई सांसद और विधायक और कई स्थानीय नेता भी माहवारी स्वच्छता प्रबंधन के मुद्दे पर काम कर रहे हैं। सांसद सुष्मिता देव ने 2014 में मध्य प्रदेश में सैनेटरी नैपकिन से कर हटाने के लिए अभियान चलाया था। वहीं, सांसद निनोंग एरिंग ने महिलाओं को पेड मेंस्ट्रुअल लीव की बात करने वाले प्राइवेट मेंबर बिल को ड्राफ्ट किया था।

हमें उन डिसिज़न मेकर्स की पहचान करनी होगी, जिन्हें इस मुद्दे से फर्क पड़ता है, जिनके पास इस मुद्दे से संबंधित पावर है और जिनके अधिकार क्षेत्र में यह आता है, जिससे आपकी मांग पर एक्शन की ज़्यादा उम्मीद बन सके।

डिसिज़न मेकर के चुनाव के समय एक और ज़रूरी बात जिसपर आपको ध्यान देना ज़रूरी है। सरकारी विभागों में माहवारी स्वच्छता प्रबंधन से संबंधित अलग-अलग मुद्दों पर अलग-अलग विभाग काम कर रहे हैं। ऐसे में यह पहचानना ज़रूरी है कि आपकी मांग किस विभाग और किस स्कीम से संबंधित है।

उदाहरण के लिए, अगर आपको स्कूल के इंफ्रास्ट्रचक में सुधार चाहिए तो आपके लिए सही मंत्रालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय होगा। लेकिन जब बात स्वच्छता और समुदाय में पानी की उपलब्धता की होगी, तो उसके लिए सही मंत्रालय, पेयजल और स्वच्छता मंत्रालय होगा।

अपने डिसिज़न मेकर तक अपनी मांग कैसे पहुंचाएं

एक बार जब आप डिसिज़न मेकर का चुनाव कर लें, उसके बाद ज़रूरी है कि आप अपनी समस्या और उससे जुड़ी आपकी मांग को सही तरीके से रखें, यानी उनतक अपनी मांग सही तरीके से पहुंचाएं।

सभी डिसिज़न मेकर्स के पास रोज़ाना इस तरह की कई समस्याएं आती हैं, इसलिए ज़रूरी है कि आप अपने मुद्दे की महत्ता उन्हें सही तरीके से समझाएं और उनका ध्यान उस ओर खींचे।

इसके बाद आपको इस बात का पता लगाना ज़रूरी है कि वह डिसिज़न मेकर आपकी बात क्यों सुने? उसमें उनकी क्या दिलचस्पी हो सकती है? अगर आपने किसी राजनेता का चुनाव किया है तो शायद उनका मोटिवेशन चुनाव में ज़्यादा वोट पाना हो और अगर आपने किसी स्कूल के प्रिंसिपल का चुनाव किया है तो उनकी दिलचस्पी माहवारी के समय बच्चों की सुरक्षा और सुविधा की उपलब्धता के ज़रिए स्कूल में बच्चों के प्रदर्शन में सुधार करना हो सकता है।

अपनी चिट्ठी में एक स्पष्ट मांग का निर्धारण करना और अपनी चिट्ठी को साधारण और प्रत्यक्ष रखना एक मुश्किल काम है। मुश्किल भाषा के चुनाव से शायद आपकी बात सही तरीके से नहीं पहुंच पाए, इसलिए आपकी भाषा जितनी साधारण होगी, उतना बेहतर होगा।

डिसिज़न मेकर को संबोधित करें और बताएं कि आपका मुद्दा क्या है और उसके बारे में उन्हें क्यों फिक्र करनी चाहिए। उनको मुद्दे से संबंधित अपनी मांग के बारे में बताएं। एक बात का ख्याल रखें, आपकी बात साधारण और विनम्र भाषा में लिखी गई हो।

आपके पास है ओपन लेटर लिखकर ₹30,000 जीतने का मौका

आपके पास मौका है एक ओपन लेटर लिखकर ₹30,000 जीतने का। आपको अपने स्थानीय प्रतिनिधि से माहवारी स्वच्छता व्यवस्थाओं की मांग करते हुए ओपन लेटर लिखना होगा। प्रतियोगिता के बारे में विस्तार से जानने और हिस्सा लेने के लिए यहां क्लिक करें।

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