प्रधानमंत्री जी, भारत दुनिया के डेमोक्रेसी इंडेक्स में 10 पायदान नीचे क्यों गिरा?

भारत और भारत के महान पुरखो ने इस देश को एक समाजवादी धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक राष्ट्र बनाया जो हमारे संविधान के प्रियेम्बल में वर्णित है। हमारा संविधान भारत के प्रत्येक नागरिक को सामाजिक पक्षी और राजनीतिक समानता का अधिकार देता है इसीलिए यह संविधान विश्व का सबसे महान संविधान कहा जाता है हमें उसको आज 26 जनवरी के दिन निश्चित तौर पर याद करना चाहिए और इसका उद्घोष करना चाहिए ।

भारतीय संविधान का प्रियेम्बल क्या कहता है?

हम भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण प्रभुत्व सम्पन्न, समाजवादी, पंथनिरपेक्ष, लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए तथा उसके समस्त नागरिकों को: सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक न्याय, विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म और उपासना की स्वतंत्रता, प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की और एकता अखंडता सुनिश्चित करनेवाली बंधुता बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्प हो कर अपनी इस संविधान सभा में आज तारीख 26 नवंबर, 1949 ई० “मिति मार्ग शीर्ष शुक्ल सप्तमी, संवत दो हज़ार छह विक्रमी) को एतद संविधान को अंगीकृत, अधिनियिमत और आत्मार्पित करते हैं।

ऊपर में वर्णित संविधान की उद्देशिका के बारे में कहा जाता है कि भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु की शब्द सह लिखे गए उद्देशिका को ही संविधान का प्रियेम्बल मान लिया गया। इसमें 42 वें संविधान संशोधन 1976 के द्वारा और शब्द जोड़े गए जैसे समाजवादी पंथनिरपेक्ष तथा भारत की एकता और अखंडता केसवानंद भारती केस में सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के प्रस्तावना को संविधान का मूल ढांचा का हार जिससे अब इसमें किसी भी प्रकार का परिवर्तन नहीं किया जा सकता है।

संविधान में प्रस्तावित समाजवादी धर्मनिरपेक्ष भारत खतरे में

भारत का संविधान भारत की आर्थिक सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था को एक सामाजिक व्यवस्था बनाने का बात करती है जिसमें प्रत्येक नागरिक को सामाजिक शैक्षणिक और आर्थिक राजनीतिक आजादी और समानता प्राप्त होगा इन स्थितियों में किसी भी नागरिक के अधिकार का हनन नहीं हो तथा सत्ता और अर्थ का वितरण सामने रूप से होता कि भारत के समाजवादी और लोकतांत्रिक विकसित राष्ट्र बन सके।

धारा 370 और नागरिकता अधिनियम  संविधान पर हमला

वर्तमान में केंद्र की सरकार ने जिस तरीके से जम्मू कश्मीर धारा 370 या फिर नागरिकता संशोधन कानून पास करके भारत के संविधान के मूल ढांचे पर हमला किया है तू कि भारतीय संविधान का अनुच्छेद 14 समानता का अधिकार अनुच्छेद 15 जाति और धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं करने के राज्य का दायित्व और अनुच्छेद 21 जीवन जीने की आज़ादी का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन है।

यह अत्यंत ही चिंताजनक है इन दोनों कृत्यों का भारत में तो विरोध हो ही रहा है लेकिन भारत के बाहर ही इसका पुरज़ोर विरोध हो रहा है जो कि भारत के लोकतांत्रिक वैश्विक महत्व को क्षति पहुंचाने वाला है।

भारत ने अपना 71वा गणतंत्र दिवस मनाया। 26 जनवरी 1950 में भारत ने अपने आप को समाजवादी धर्मनिरपेक्ष  गणराज्य राष्ट्र होने की घोषणा की थी तथा गणतंत्र के 71 वर्ष होने के बाद भी हम गणतंत्र के मूल्यों पर चर्चा कर रहे हैं। आज वर्तमान सरकार के समय में यही गणतंत्र और संविधान खतरे में है।

हमारे संविधान निर्माताओं और भारत को आजादी दिलाने वाले स्वतंत्रता सेनानियों ने यह नहीं सोचा था कि भारत संकीर्ण मानसिकता वाले लोगों के नेतृत्व में चलेगा जो भारत को पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान से मुकाबला कराएगा ना कि अमेरिका जापान और यूरोप से हमारे संविधान निर्माताओं के सपनों से विपरीत वर्तमान सरकार देश को तोड़ने का काम कर रहा है जो कि गणतंत्र पर हमला है।

धर्म विशेष से भेदभाव करने वाला कानून

हमारे संविधान निर्माताओं और स्वतंत्रता सेनानियों ने यह नहीं सोचा था कि इस देश में नागरिकों की पहचान उनकी जाति उनके धर्म इत्यादि से होगी उन्होंने ऐसे राष्ट्र की परिकल्पना की थी जहां किसी भी धर्म और मज़हब जाति का व्यक्ति अपनी योग्यता अपने सक्षमता की बदौलत अपने राष्ट्र की उन्नति में योगदान दे सकता है।

आज भारत की जो तस्वीर पूरी दुनिया में बनकर उभर रही है वह एक संकीर्ण हिंदूवादी राष्ट्र की है जिसके ऊपर अंतरराष्ट्रीय जगत में खास करके अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बहुत चर्चा है और भारत की आलोचना की जा रही है इस तरह का स्थिति देश के संवैधानिक और लोकतांत्रिक मूल्यों को वैश्विक स्तर पर चोट पहुंचाने वाला साबित हो रहा है और इसके लिए अगर कोई जिम्मेदार है तो वह है भारतीय जनता पार्टी और अमित शाह नरेंद्र मोदी की जोड़ी।

सरकार और नागरिकों के बीच में चल रहा अघोषित युद्ध

किसी भी राष्ट्र की उन्नति और विकास में उसका आंतरिक सद्भाव शांति महत्वपूर्ण कारण होता है लेकिन आज जो परिदृश्य भारत में बन रही है वह दुखद और दुर्भाग्यपूर्ण है हमारे देश के नागरिक आज सड़कों पर हैं और सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं देश के सभी विश्वविद्यालयों में विद्यार्थी आंदोलन पर हैं और वे अपने हक और हुकूक की लड़ाई लड़ रहे हैं उन सभी की मांग सरकार से हैं और लड़ाई भी।

सरकार और नागरिकों के बीच में चल रहा अघोषित युद्ध आर्थिक विकास को क्षति पहुंच रहा है

संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन

नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 एक ऐसा कानून है जो भारत में भारत के नागरिकों को धर्म के आधार पर विभाजन करता है यह कानून भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 में वर्णित कानून से पहले समता के अधिकार के खिलाफ है क्योंकि यह धर्म विशेष के लोगों को नागरिकता देने से रोकता है तथा धर्म विशेष के लोगों को नागरिकता देने में विशेष प्रावधान करता है।

भारत का अंतर्राष्ट्रीय अपमान

आपको बता दें कि नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 को वैश्विक स्तर पर भी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है और यूनाइटेड नेशन ने अपने बयान में इस विधेयक को पूर्णत: नागरिकों के मौलिक अधिकार के खिलाफ तथा धर्म के आधार पर भेदभाव करने वाला बताया है विश्व की प्रतिष्ठित पत्रिका द इकोनॉमिक्स और न्यूज़ पेपर्स में भी इस कानून के खिलाफ आर्टिकल लिखे इकोनॉमिस्ट ने अपने लेख में लिखा है।

गणतंत्र दिवस से पहले गणतंत्र के इंडेक्स में भारत 10 पायदान पिछला

हमारे गणतंत्र दिवस के 2 दिन पहले वैश्विक डेमोक्रेसी रैंकिंग के आंकड़े जारी किए गए जिसमें हमारे देश की रैंकिंग में 10 स्थान की गिरावट आई है यह गिरावट हमारे देश अल्पसंख्यकों और वंचित समाज के लोगों के बीच में बढ़ते असंतोष और देश के संवैधानिक मूल्यों में हो रही गिरावट के कारण आया है। वर्तमान सरकार उन तमाम चीज़ों को कर रही है जो देश के सेकुलर सोशलिस्ट डेमोक्रेटिक स्ट्रक्चर को तोड़ता है।

वर्तमान सरकार यह दावा कर रही है कि वह सबका साथ सबका विकास करती है लेकिन वैश्विक मानव विकास  के आंकड़े आए हैं जिसके अनुसार दुनिया का हर तीसरा गरीब भारतीय है और 28% दुनिया का गरीब भारत में निवास करता है इस स्थिति में भी हमारे देश के प्रधानमंत्री गरीबी से नहीं बल्कि नागरिकों से लड़ने का काम कर रहे हैं यह सबसे दुर्भाग्य की बात है।

भारत के आर्थिक मंदी से दुनिया में आर्थिक मंदी

वर्ल्ड इकोनामिक फोरम के चीफ इकोनॉमिस्ट ने अपने बयान में यह बताया है कि दुनिया चल रहे वैश्विक आर्थिक मंदी का सबसे बड़ा कारण भारत में हो रहा घोर आर्थिक मंदी है क्योंकि भारत अपने इतिहास के सबसे बड़े और विकराल आर्थिक मंदी से गुजर रहा है जहां ग्रामीण अर्थव्यवस्था में डिमांड कम गया है जिसके कारण पूरी अर्थव्यवस्था चौपट हो गई है नौकरियां कम हो गई है युवा बेहाल है।

ऊपर में वर्णित तथ्यों से आज का गणतंत्र दिवस हमें सचेत होने को कहता है कि अभी भी समय है चेत जाओ अन्यथा जिस तरह से यह सरकार तानाशाही रवैया अपना रही है उससे वह दिन दूर नहीं जब वह एकाएक देश में संकीर्ण ब्राह्मणवादी हिंदू राष्ट्र वाला संविधान लागू कर दे और वर्तमान संविधान को ध्वस्त करदे आत: संघर्ष और सचेत रहने की अति आवश्यकता है।

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