बजट 2020 में वित्त मंत्री ने चलाई दलितों और वंचितों की कल्याण योजनाओं पर कैंची

मोदी सरकार ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के माध्यम से 1 फरवरी को संसद में 2020-21 का वार्षिक आम बजट पेश किया। इस बजट में गिरती अर्थव्यवस्था को सुधारने, शिक्षा स्वास्थ्य और कृषि पर विशेष ध्यान देने की बात कही गई लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।

डॉ. अंबेडकर और महात्मा गाँधी ने कहा था कि जब तक समाज की अंतिम पंक्ति में बैठने वाले व्यक्ति का विकास नहीं होगा, तब तक राष्ट्र का विकास संभव नहीं है।

सरकार के बजट का विश्लेषण करने से ऐसा प्रतीत होता है कि इस सरकार ने समाज के वंचित वर्ग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और ओबीसी समाज के शैक्षणिक विकास से जुड़ी योजनाओं के बजट पर तलवार चलाने का काम किया है। ऐसे में वंचितों की शिक्षा से जुड़ी योजनाओं पर सरकार के बजट का विश्लेषण और विवरण करना ज़रूरी हो जाता है।

निर्मली सीतारमण
निर्मली सीतारमण

अनुसूचित जाति और आम बजट 2020-21

मोदी सरकार ने अनुसूचित जाति के लोगों के सामाजिक शैक्षणिक विकास के लिए इस बजट में कुल 85000 हज़ार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। यह पैसा सरकार के  विभिन्न विभागों के माध्यम से दलितों के कल्याण पर खर्च किया जाएगा ।

क्या सरकार वास्तव मे हज़ारों करोड़ रूपये दलितों के विकास पर खर्च करती है? जबाब है नहीं। SCSP यानी Scheduled caste Sub Plan  बजट 2019-20 का जब  हम विश्लेषण करते हैं, तो पाते हैं कि 31 जनवरी 2020 तक सरकार ने मात्र 45545.48 करोड रुपए खर्च किये गए हैं, जो कि प्रतिशत में आवंटित बजट 81339. 44 करोड़ का मात्र 56% है।

सरकार द्वारा दलितों के नाम पर हज़ारों करोड़ रुपए का बजट आवंटित करना और उसका सदुपयोग नहीं करना सरकार के मंसूबों पर प्रश्न चिन्ह खड़ा करता है। इससे सवाल पैदा होता है कि क्या सरकार दलितों के नाम पर बजट में हज़ारों करोड़ रुपए का प्रावधान करके, फिर बजट को लैप्स करके दलितों को सिर्फ मूर्ख  बनाने का काम करती है?

फोटो साभार- getty images

पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में 50% बजट की कटौती

इस बजट में एक्सक्लूज़िवली अनुसूचित जाति के विकास से संबंधित योजनाओं के बजट में 6242.33 करोड़ रूपया दिया है। जो कि 2018-19 के 7574.34 करोड रुपए से 1332 करोड़ कम है। प्रतिशत में यह 17% का कटौती है, जो कि बहुत ज़्यादा है।

योजनावार तरीके से यदि हम देखें, तो दलितों  की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने वाली मुख्य योजना, पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप अनुसूचित जाति में इस इस बजट में 2987.33 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है जो कि 2018-19 के 5928.16 करोड़ मुकाबले 2940.83 करोड़ कम है जो कि 50% की कटौती है।

दलितों की रैली
दलितों की रैली

दलितों के कल्याण के लिए संचालित योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए अनुसूचित जाति सब योजना के अंतर्गत राज्य सरकारों को विशेष केंद्रीय सहायता योजना में इस सरकार ने मामूली बढ़ोतरी किया है। पिछले वर्ष 1100 करोड़ का प्रावधान था इस वर्ष सरकार ने 1200 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

दलितों के शैक्षणिक कल्याण के अन्य योजना प्री मैट्रिक स्कालरशिप में सरकार ने 115 करोड़ के बजट से बढ़ाकर के 700 करोड़ रुपए किया है यह सराहनीय काम है लेकिन इस योजना में और आवंटन की आवश्यकता थी इसी प्रकार अस्वच्छ कार्यों में संलग्न व्यक्तियों के बच्चों के प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप योजना में पिछले वर्ष 30 करोड़ रुपए के मुकाबले इस बार मात्र 25 करोड़ रूपया दिया गया है ।

एससी एसटी एक्ट को मजबूत करने वाली योजना में  80 करोड़ की कटौती

सिविल राइट प्रोटक्शन एक्ट 1955 तथा एससी एसटी एक्ट 1989 को मजबूती प्रदान करने तथा पीड़ितों को सहायता देने संबंधित योजना में सरकार ने भारी कटौती किया है ।

वर्ष 2019-20 में जहां 630 करोड़ का प्रावधान था, उसको 2020-21 में घटाकर मात्र 550 करोड़ किया गया है। सरकार ने  इस योजना में 80 करोड़ की कटौती की है। इसका दुष्परिणाम बढ़ते अत्याचार झेल रहे दलितों की सहायता पर पड़ेगा।

मोटा मोटी तौर पर मोदी सरकार ने दलितों के शैक्षणिक और सामाजिक  योजनाओं पर तलवार चलाने का काम किया है अब आप आकलन कर सकते हैं कि इसका दुष्परिणाम क्या होगा? गरीब दलित अपना शिक्षा इस महंगाई के दौर में कैसे प्राप्त कर पाएंगे?

अनुसूचित जनजाति और आम बजट 2020-21

अनुसूचित जनजाति के सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए मोदी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2020-21 में 53700 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है यह पैसा आदिवासियों के कल्याण के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के द्वारा खर्च किया जाएगा।

सरकार ने रिकॉर्ड बनाने के लिए ₹53000 का प्रावधान तो कर दिया लेकिन क्या वास्तव में सरकार इसको आदिवासियों के कल्याण पर खर्च कर पाती है वित्तीय वर्ष 2019-20 का सरकार का ब्योरा बताता है कि सरकार ने 31 जनवरी 2020 तक मात्र आवंटित बजट 51283.53 मे से मात्र 62% हिस्सा खर्च किया है।

बेरोज़गार युवा
प्रतीकात्मक तस्वीर

आदिवासियों के शैक्षणिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में इस सरकार ने मामूली बढ़ोतरी किया है पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप में पिछले वर्ष 1826 करोड़ का प्रावधान था उसको 1900 करोड़ किया गया है लेकिन प्री मैट्रिक स्कालरशिप में सरकार ने पिछले वर्ष के मुकाबले 40 करोड़ कम 400 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

अनुसूचित जनजाति के शैक्षणिक और सामाजिक विकास के लिए संचालित योजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष केंद्रीय सहायता एसटी योजना में सरकार ने कोई बदलाव नहीं किया और पिछले वर्ष के बराबर हैं 1350 करोड रुपए का प्रावधान किया।

आदिवासियों के विकास के लिए संविधान के अनुच्छेद 272(1) योजना  बजट में 50% कि कटौती

यहां महत्वपूर्ण बात है कि अनुसूचित जनजाति के सामाजिक और शैक्षणिक विकास के लिए संचालित योजनाओं में केंद्र सरकार के तरफ से विशेष सहायता जो संविधान के अनुच्छेद 272(1) के तहत दिया जाता है उसमें पिछले वर्ष 2662.55 करोड़ था उसको घटाकर 1350 करोड़ किया गया है सरकार ने इसमें 50% की कटौती की है।

52% ओबीसी का बजट में 0% हिस्सा भी नहीं

ओबीसी के सामाजिक और शैक्षणिक कल्याण से जुड़ी योजनाओं में इस सरकार ने कोई बढ़ोतरी नहीं किया और पिछले वर्ष के मुकाबले लगभग उतना ही बजट रखा है आपको बता दें कि देश की 52% आबादी ओबीसी है लेकिन सरकार का बजट में उनका हिस्सा नगण्य है 0% से भी कम है।

दलितों की प्रतीकात्मक तस्वीर
दलितों की प्रतीकात्मक तस्वीर

ओबीसी के सामाजिक और शैक्षणिक विकास से संबंधित योजनाओं में सरकार ने कोई बढ़ोतरी नहीं की और पिछले वर्ष के समान बजट का प्रावधान किया है। पोस्ट मैट्रिक स्कॉलरशिप ओबीसी में सरकार ने 1415 करोड़ प्री मैट्रिक स्कॉलरशिप ओबीसी योजना में 250 करोड़ तथा बॉयज और गर्ल्स हॉस्टल के निर्माण के लिए संबंधित योजना में ₹50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया है।

अपेक्षा के विपरीत बजट में कटौती करके वंचितों को किया निराश

सरकार से बहुत उपेक्षा थी कि सरकार आर्थिक संकट की घड़ी में समाज के वंचित जनों को प्रोत्साहित करेगी लेकिन जिस तरीके से देश में आर्थिक संकट है, सरकार ने उसका निदान दलितों, आदिवासियों और पिछड़े वर्गों के बजट में कटौती करके निकाला है।

इसलिए कुल मिलाकर यदि हम इस बजट को आदिवासी, दलित और पिछड़े वर्ग के नज़रिए से देखें, तो यह एससी, एसटी और ओबीसी विरोधी बजट है। यह बजट समाज के वंचित वर्गों के सामाजिक और शैक्षणिक विकास को नकारात्मक रूप से प्रभावित करने वाला है।

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