दिल्ली में भड़की हिंसा के लिए ज़िम्मेदार कौन है?

दिल्ली में नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन जारी है। नागरिकता कानून को लेकर हो रहे प्रदर्शन की कड़ी में दिल्ली के जाफराबाद और चांद बाग जैसी जगहों के नाम जुड़ गए हैं। वहीं, सरिता विहार और जसोला जैसे इलाके शाहीन बाग में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के खिलाफ प्रोटेस्ट करने वाली जगहों के तौर पर पहचान बना चुके हैं।

फिलहाल दिल्ली, प्रदर्शन के उस रण में तब्दील हो चुका है जिसकी कल्पना कोई भूले से भी करने की जुर्रत नहीं करना चाहेगा। “रण” शब्द का इस्तेमाल इसलिए किया गया है क्योंकि बात अब प्रदर्शन से आगे निकल चुकी है और अपनों द्वारा अपनों के सिरफुटव्वल तक जा पहुंची है जहां से सिर्फ हिंसा और हिंसा ही गुलज़ार है।

क्या भाजपा नेता कपिल मिश्रा द्वारा दी गई चुनौती ने आग में घी का काम किया?

भारतीय जनता पार्टी के नेता कपिल मिश्रा ने रविवार दोपहर दो बजे ट्विट कर मौजपुर रेड लाइट पर CAA के समर्थन में दोपहर तीन बजे प्रदर्शन करने का एलान किया। फिर क्या CAA के समर्थन में लोग मौजपुर में एकजुट होना शुरू हो गए। कुछ ही देर में काफी लोग एकत्रित हो गए।

मौजपुर में हुए इस प्रदर्शन के दौरान पथराव

जाफराबाद से सटे मौजपुर में दोनों समूहों के बीच पथराव आरम्भ हो गएं। ये झड़प CAA विरोधियों और कपिल मिश्रा समर्थकों के बीच हुई। मौजपुर चौराहे के पास पथराव के बाद हालात को काबू में करने के लिए पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस के गोले दागे और सुरक्षा कारणों के चलते मौजपुर-बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के गेट बंद कर दिए गए।

खबर के मुताबिक कपिल मिश्रा द्वारा एकत्रित भीड़ ने CAA के समर्थन में प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। उसी समय भीम सेना के कुछ समर्थक नारेबाज़ी करते हुए वहां से गुज़र रहे थे। ज्ञात हो कि भीम सेना के लोगों ने रविवार को भारत बंद का एलान किया था। अब प्रदर्शन कर रहे लोगों की भीम सेना के समर्थकों से नारेबाज़ी को लेकर कहासुनी हो गई। दोनों ही पक्षों में हाथापाई होने लगी। प्रदर्शन कर रहे लोगों ने भीम सेना के समर्थकों को पीट दिया था और उनकी गाड़ी तोड़ दी।

भीम सेना के समर्थक वहां से चले गएं। तभी ज़िला डीसीपी वेदप्रकाश सूर्या वहां पहुंचे और समर्थकों से शांति बनाए रखने व स्थान को खाली करने की अपील करने लगें। कुछ देर बाद कबीर नगर की तरफ से एक गुट के लोग आए और समर्थन में प्रदर्शन कर रहे लोगों पर पत्थरबाजी शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों ही तरफ से पत्थरबाजी शुरू हो गई थी। पत्थरबाजी करीब एक घंटे तक चली थी। पुलिस काफी देर बाद मौके पर पहुंची था। देर रात को भारी पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया था।

कपिल मिश्रा ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए कपिलशर्मा ने कहा

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के जाने तक हम शांति से जा रहे हैं। इस दौरान CAA के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों से जाफराबाद और चांद बाग की सड़कें खाली करवाइए, इसके बाद हमें मत समझाइएगा। हम आपकी भी नहीं सुनेंगे। अब सिर्फ तीन दिन हैं।

जाफराबाद-सीलमपुर में धरने पर बैठीं महिलाएं

जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे महिलाएं नागरिकता कानून और एनआरसी के विरोध में प्रदर्शन पर बैठ गईं, जिस वजह से जाफराबाद मेट्रो स्टेशन पर एक तरफ की रोड बंद हो गई। दूसरी तरफ मेट्रो स्टेशन पर ना तो मेट्रो रूक रही है और ना ही लोगों को अंदर और बाहर जाने दिया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों ने जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के निकट सीलमपुर, मौजपुर और यमुना विहार को जोड़ने वाली सड़क को बंद कर दिया। खबर है कि 22 फरवरी की रात तकरीबन 200 से 300 महिलाओं ने आकर मेट्रो के नीचे प्रदर्शन करना शुरू कर दिया था। जिसके बाद वहां बड़ी संख्या में पुलिस के जवान और अर्धसैनिक बलों की तैनाती हुई।

चांद बाग में भी विरोध प्रदर्शन

शाहीनबाग में नागरिकता संशोधन अधिनियम के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन का 71वां दिन था। ज्ञात हो कि प्रदर्शनकारियों से बात करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने वार्ताकार नियुक्त किए थे लेकिन अभी तक उनकी बातचीत बेनतीजा रही है। इस बीच दिल्ली के चांद बाग इलाके में CAA, NRC और NPR के खिलाफ लोगों ने प्रदर्शन किया।

जसोला-सरिता विहार में शाहीन बाग के खिलाफ प्रदर्शन

इस बीच जसोला और सरिता विहार में स्थानिय लोगों ने शाहीन बाग में चल रहे एंटी-CAA प्रोटेस्ट के खिलाफ प्रदर्शन आरम्भ कर दिया। स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन के चलते बंद सड़क खोलने की मांग की।

अलीगढ़ में भी प्रदर्शन के दौरान हिंसा

अलीगढ़ में आज CAA-NRC के विरोध में जारी प्रदर्शन में हालात बेकाबू हो गएं। धरने पर बैठी महिलाओं को हटाने को लेकर ज़बरदस्त बवाल शुरू हो गया। जिसके बाद आगजनी भी होने लगी। अलीगढ़ स्थित ऊपरकोट के बाद बाबरी मंडी और घास की मंडी में पथराव हुआ। कई बाइकों को आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा के बाद अलीगढ़ में रविवार आधी रात तक इंटरनेट बंद कर दिए जाने की खबर है।

क्या कपिल मिश्रा के एलान के बाद हुई हिंसा रुक सकती थी?

अगर दिल्ली पुलिस अलर्ट हो जाती तो शायद जाफराबाद के मौजपुर में हालात तनावपूर्ण नहीं होते और ना ही पत्थरबाज़ी होती। दोनों पक्षों के बीच जब पत्थरबाज़ी हो रही थी उस समय भी मौके पर पुलिसकर्मी बहुत कम संख्या में थे। खबर है कि दिल्ली पुलिस के कुछ जवानों के अलावा आरपीएफ के कुछ जवान ही दिखाई दे रहे थे। इलाके में देर रात तक हालात तनावपूर्ण बने रहें। जबकि दिल्ली पुलिस के अधिकारी स्थिति के नियत्रंण में होने का दावा कर रहे थे।

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