कोरोना वायरस के कारण दुनियाभर में खत्म हो सकती हैं 2.5 करोड़ नौकरियां

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चीन के वुहान शहर से एक वायरस ने जन्म लिया। धीरे-धीरे वह शहर में फैलने लगा और देखते ही देखते चीन को अपनी गिरफ्त में ले लिया। इस वायरस का नाम है कोरोना जिसने ना सिर्फ चीन बल्कि पूरे विश्व की नींद उड़ा दी है।

आज पूरा विश्व इस वायरस से लड़ रहा है और लगातार इस पर काबू पाने की भिन्न-भिन्न रणनीति बना रहा है। वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइज़ेशन ने कोरोना वायरस को एक महामारी घोषित कर दिया।

कोरोना वायरस कहकर एक-दूसरे का मज़ाक उड़ाना शर्मनाक

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प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो साभार- सोशल मीडिया

कोरोना वायरस का असर सिर्फ मनुष्य के स्वास्थ्य पर ही नहीं पड़ रहा है, बल्कि ऐसे बहुत से पहलू हैं जिन पर इनका असर नज़र आ रहा है। इनमें से एक असर यह भी दिखाई पड़ा कि हमारे देश के ही नागरिकों को कोरोना वायरस कहकर उनका मज़ाक उड़ाया जा रहा है।

पहले भी नॉर्थ ईस्ट के लोगों को अलग-अलग नाम देकर उनका मज़ाक उड़ाया जाता रहा है। दूसरों का मज़ाक उड़ाकर खुश रहना ना जाने क्यों लोगों को इतना भाता है।

इसके अलावा बहुत सारे लोग कोरोना वायरस को लेकर मज़ाक भी बना रहे हैं। उनके लिए यह वायरस सिर्फ टिक टॉक पर मज़ाकिया वीडियो बनाने तक ही सीमित है। इस वायरस के तेज़ी से फैलने के साथ-साथ बहुत सी गलत धारणाएं भी उतनी तेज़ी से फैल रही हैं।

कोरोना संक्रमण के बीच मुनाफे का सौदा करता बाज़ार

फोटो साभार- सोशल मीडिया
लॉकडाउन की घोषणा के बाद बाज़ार में भीड़। फोटो साभार- सोशल मीडिया

इसके साथ-साथ लोगों के मन मे इस वायरस का खौफ भी घर कर रहा है। हर कोई छीकते और खांसते हुए व्यक्तियों को संदिग्ध समझ रहा है और एक नफरत और डर की भावना से उनको देख रहा है। यह समय पूरी दुनिया के लिए एक मुश्किल भरा समय है।

हर देश इस समस्या से निपटने के लिए अलग-अलग रणनीति बना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ सिर्फ मुनाफे के लिए सैनिटाइज़र और मास्क के दामों में अचानक वृद्धि भी देखने को मिल रही है। ऐसे दौर में मुनाफे के बारे में सोचना इस बात की तरफ इशारा करता है कि हम कितने गैर-ज़िम्मेदार नागरिक हैं।

इसके साथ-साथ कुछ लोगों के डर को अपना रोज़गार बनाते हुए कोरोना वायरस को झाड़फुक, मंत्रों ओर गौमूत्र से भगाने का दावा भी किया है। उपरोक्त पहलुओं के अलावा एक पहलू यह भी नज़र आया जब एक न्यूज़ चैनल ने सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए पड़ोसी देश को कोरोना की मौत मरने जैसी खबरों को चलाया।

पूरे विश्व को साथ खड़े होने की ज़रूरत

फोटो साभार- सोशल मीडिया
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो साभार- सोशल मीडिया

आज भी गाँवों और शहरों में पड़ोसी के साथ कितने ही रिश्ते खराब हों लेकिन बुरे वक्त में सब एक साथ खड़े हो जाते हैं। इस समय बहुत ज़रूरी है कि हम एक ग्लोबल समुदाय के रूप में एक-दूसरे का साथ देकर इस महामारी से निपट जाएं। एक दूसरे को भद्दी टिप्पणियों में समय नष्ट करने से अच्छा है एक-दूसरे का साथ देना।

कोरोना वायरस के असर और पहलुओं को लेकर अभी तक हमने बहुत सीमित दायरे तक बात की है लेकिन इसका एक महत्वपूर्ण और चिन्तनीय विषय है रोज़गार पर इसका प्रभाव। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार कोरोना वायरस महामारी के कारण दुनिया भर में लगभग 2.5 करोड़ नौकरियां खत्म हो सकती हैं।

इसके फल स्वरूप पूरा विश्व आर्थिक मंदी या महा आर्थिक मंदी की चपेट में आ सकता है। बहुत सारे उद्योगों की कमर पहले ही इस वायरस ने तोड़ दी है। ऐसे में छोटे उद्योगों और मज़दूरों पर इसका क्या असर होगा इसकी चिंचा बेहद डरावनी है।

आर्थिक मंदी से निपटने के लिए योजनाओं पर हो बात

कोरोना वायरस की महामारी के बाद आने वाली समस्याओं को समझना और उनका हल तलाशना हमारे लिए एक अहम ज़िम्मेदारी है। पूरे विश्व को मिलकर साझी योजनाओं के ज़रिये आर्थिक मंदी से निपटने की रणनीति तैयार करनी होगी।

आज हर देश आधुनिक हथियारो और उपकरणों से लैस है लेकिन क्या ये विश्व कोरोना वायरस जैसी महामारी से लड़ने के लिए तैयार है? क्या आर्थिक मंदी के लिए कोई योजना विश्व के पास है? क्या हम सिर्फ लड़ाई के लिए तैयार रखते हैं?

प्राकृतिक या मनुष्य द्वारा निर्मित आपदाओं के लिए विश्व तैयार क्यों नही हैं? इन सवालों के बारे में ना केवल सोचना ज़रूरी है बल्कि इस पर उचित कदम उठाने की भी ज़रूरत है।

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