WHO के सुझाव जो कोरोना संक्रमण से आपको बचाने के लिए मददगार हो सकते हैं

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आज के आधुनिक दौर में मानव जाति अपने और समाज के लिए नई से नई और बेहतर बेहतर तकनीकों का विकास करती जा रही है। जिसे आज हम सब अपने सामने देख ही नहीं, बल्कि इस्तेमाल भी कर रहे हैं।

इन तकनीकों से होने वाले सकारात्मक प्रभावों के साथ-साथ हमें इनके दुष्प्रभावों का भी सामना करना पड़ता है। अत: इन दुष्प्रभावों को पहचानने के साथ-साथ हमें इससे बचने की कोशिश भी करनी चाहिए।

संक्रामक रोग पहले से ज़्यादा बढ़े हैं: WHO

फोटो साभार- WHO
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इसी आधुनिक युग में अगर मानव एवं उसके स्वास्थ्य की बात की जाए तो विश्व स्वास्थय संगठन (WHO) की एक वार्षिक रिपोर्ट पर नज़र डालिए। जिसके अनुसार संक्रामक रोग पहले से ज़्यादा बढ़ रहे हैं।

जिनका इलाज भी पहले से मुश्किल हो गया है। प्रत्येक वर्ष एक या उससे ज़्यादा नए रोग सामने आ रहे हैं। साथ ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने एक रिपोर्ट में यह भी कहा कि पिछले 50 बर्षों से संक्रामक रोग में बढ़ती तेज़ी का कारण हवाई यातायात में वृद्धि है।

यदि मानव स्वास्थ्य को मौजूदा हालात में विश्व स्तर पर देखा जाए तो बहुत गंभीर मामले नज़र आते हैं। जिसके परिणाम हमारे सामने हैं जो आगे क्या रूप ले सकते हैं हम सब यह अच्छे से जानते हैं।

महामारी इस तरह फैल रही है कि लगभग सारे देश एक-एक कर इसकी चपेट में आते जा रहे हैं। फिलहाल इस महामारी का नाम है कोरोना वायरस। जिसको हाल में नोबेल कोरोना वायरस नाम दिया गया जिसने दिसंबर 2019 में चीन के वुहान शहर में अपनी दस्तक दी और धीरे-धीरे पूरे विश्व को अपनी गिरफ्त में ले लिया। विश्व स्तर पर हालात कुछ यूं हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से कोरोना वायरस पर अलर्ट जारी कर दिया गया है।

कोरोना वायरस की कोई वैक्सीन या दवा फिलहाल उपलब्ध नहीं है

ज़्यादातर लोग जानते हैं और शायद आप भी जानते होंगे कि अभी तक कोरोना वायरस के लिए कोई भी वैक्सीन या दवा नहीं बन पाई है। सभी देश अपने-अपने स्तर पर कोशिश कर रहे हैं मगर कोई भी पुख्ता इलाज हाथ नहीं आया है।

डॉक्टर्स लक्षणों के आधार पर इलाज कर रहे हैं जिससे कई मरीज़ ठीक भी हुए हैं लेकिन इस आधार पर यह कहना गलत होगा कि यह कोरोना के लिए पुख्ता इलाज है। सभी डॉक्टर कोशिश कर रहे हैं जो सराहनीय है। हमें भी अपने-अपने स्तर पर इनकी मदद करनी चाहिए।

मौजूदा हालातों पर हम सबको गौर करने की बहुत आवश्यकता है और सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों को भी नज़रअंदाज़ करना चाहिए। हमें ध्यान रखना होगा कि सही व गलत की पहचान के बाद ही उसको सोशल मीडिया पर शेयर करें।

हम क्या-क्या पढ़ व शेयर कर सकते हैं?

फोटो साभार- WHO
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  • कोरोना तथा इसके बचाव व इलाज से संबंधित विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा शेयर की गई अवेरनेस सामग्री।
  • भारत सरकार या उनके अधिकृत सोशल मीडिया अकाउंट द्वारा शेयर की गई सामग्री जो कोरोना से बचाव या इलाज से संबंधित है। उदहारण: प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति द्वारा।
  • यदि आप इंटरनेट पर इसके बारे में अधिक जानकारी लेना चाहते हैं। तो विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी आधिकारिक वेबसाइट पर ही कोरोना के बचाव आदि के बारे में पढ़ें, क्योंकि इंटरनेट पर कोरोना व इससे संबंधित अफवाहों की भरमार है। जो आपको और परेशानी में डाल सकती हैं।

जैसा कि हमने ऊपर दिए हुए पैराग्राफ में पढ़ा कि अभी तक कोरोना वायरस के लिए कोई वैक्सीन नहीं बनी है, फिलहाल इसका इलाज मौजूदा लक्षणों के आधार पर ही हो रहा है। परंतु यदि आप जानते हों तो इलाज या ट्रीटमेंट किसी भी बीमारी की रोकथाम का द्वितीय चरण होता है।

बीमारी की रोकथाम के मुख्य स्तर

फोटो साभार- WHO

1. समय से पहले रोकथाम- इसे हम अंग्रेज़ी में Primordial Prevention भी कहते हैं। इस चरण में मुख्यतः हम रिस्क फैक्टर्स के बारे में चर्चा करते हैं कि किन कारणों की वजह से रोग हम पर हावी हो सकता है।

जैसे मौजूदा हालातों में लोगों को कोरोना से बचने के लिए सोशल डिस्‍टेंसिंग और हैंडवॉश आदि के बारे में बताया जा रहा है। वृद्ध और बच्चों को इसका खतरा है तो उनको बचाव की आवश्यकता भी है।

2. प्राथमिक रोकथाम: रोग की रोकथाम के इस चरण में हम बीमारी होने से पहले ही उस बीमारी की वैक्सीन लगाते हैं। जैसे नवजात शिशु को भविष्य में टीबी, पोलियो आदि जैसी बीमारियों से बचने के लिए टीकाकरण करते हैं। इसे प्राथमिक रोकथाम या Primary Prevention कहते हैं।

3. द्वितीय रोकथाम: रोकथाम के इस चरण में हम संदिग्ध मरीज़ की जांच सुनिश्चित करके उसका जल्द से जल्द ट्रीटमेंट शुरू करते हैं।

4. तृतीय रोकथाम: इस चरण में रोगी को बीमारी की वजह से हो रही परेशनियों जैसे दर्द आदि को कम करने की कोशिश करते हैं। यदि रोग बढ़ गया है तो सर्जरी आदि की मदद से उसको कम करने की कोशिश करते हैं।

कोरोना के मामले में अगर आपने ध्यान दिया हो तो समय से पहले रोकथाम यानी Primordial Prevention पर ज़्यादा ध्यान दिया जा रहा है। जो कि बहुत लाभकारी है जिसे हम आसानी से फॉलो भी कर सकते हैं।

यदि कोरोना वायरस से बचाव हेतु विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा पब्लिश सामग्री पर भी गौर करेंगे तो पाएंगे कि वे भी समय से पहले रोकथाम पर ही ज़्यादा फोकस कर रहे हैं।

बस ज़रूरत है तो हम सबके द्वारा अमल करने की। ठीक वैसे ही जैसे जनता कर्फ्यू का हमने पालन किया। अब तो पीएम मोदी ने 21 दिनों तक लॉकडाउन की घोषणा कर दी है, जिसका हमें ज़रूर पालन करना चाहिए।

हम सबको बस कोरोना और समय से पहले रोकथाम के बीच का फासला समझने की आवश्यकता है। यदि इसके महत्व को समझ लिया तो हम हमारे समाज और हॉस्पिटल में दिन-रात लगे डॉक्टर-नर्स तथा अन्य स्वास्थ्य कर्मियों को बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं। साथ ही इसे फैलने से रोक सकते हैं।

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