Corona: “क्यों मैं मोदी जी के देश के नाम संबोधन से सहमत नहीं हूं”

This post is a part of YKA’s dedicated coverage of the novel coronavirus outbreak and aims to present factual, reliable information. Read more.

कल रात आठ बजे जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संदेश दिया तब उन्होंने वो ज़रूरी काम किया जो कायदे से उनको कुछ हफ्ते पहले ही कर देना चाहिए था। देश के मुखिया होने के नाते उनका स्थान किसी परिवार के पिता से कम नहीं है।

ऐसे में देश के नाम उनका संदेश देशवासियों को मनोबल एवं दिशा प्रदान करता है। जहां तक उनके इस संदेश का सवाल है तो यह एक नपा- तुला संदेश था जिसमें कि कोरोना वायरस से होने वाले खतरे की संभावना से प्रधानमंत्री जी ने देश की जनता को अवगत कराया।

विश्व युद्ध से होने वाले नुकसान से कोरोना के संक्रमण की तुलना

FB - singapore coronavirus masks
प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो साभार- सोशल मीडिया

उन्होंने इसकी तुलना विश्व युद्ध से होने वाले नुकसान से करते हुए जनता को सजग रहने के लिए कहा। उन्होंने 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय होने वाले ब्लैकआउट की याद दिलाते हुए इस ओर ध्यान दिलाया कि जनता और सरकार के परस्पर सहयोग से ही हम मुश्किलों का सामना कर सकते हैं।

उनका आग्रह करते हुए कहा, “अमीर लोगों को इस समय अपने यहां नौकरी करने वाले उन लोगों का वेतन नहीं रोकना चाहिए जो कोरोना के कारण नौकरी पर ना आ सकेंगे।” खैर, यह बेहद सराहनीय है।

समाजवादी मूल्यों के करीब आते हुए उन्होंने देश के अमीर लोगों से जो आह्वान किया है, वह और भी ईमानदारी भरा लगता यदि प्रधानमंत्री जी उसको कानूनी रूप से से बाध्य बना देते। वैसे मेरा विश्वास है कि प्रधानमंत्री जी जल्द ही इसको कानून की शक्ल देकर देश के गरीबों को बड़ी राहत देंगे।

पीएम के इस बयान का दूरगामी असर हो सकता है!

नरेन्द्र मोदी
नरेन्द्र मोदी। फोटो साभार- सोशल मीडिया

इस सबसे हटकर एक परेशानी वाली बात भी प्रधानमंत्री जी ने कही जिसका असर दूरगामी हो सकता है। उन्होंने कहा कि वह सामाजिक, धार्मिक एवं अन्य धार्मिक संगठनों से सहयोग की आशा करते हैं। एक ओर जहां आम समाज में ऐसी अपेक्षा बिलकुल प्राकृतिक है, वहीं भारत में इस अपील के भयावह परिणाम हो सकते हैं।

भारत के पिछले अनुभवों के मद्देनज़र हम प्रधानमंत्री से ऐसे किसी वक्तव्य की आशा नहीं करते हैं। जिनकी याद्दाश्त ज़रा कमज़ोर हो उनको मैं याद दिलाना चाहूंगा कि लोगों को जब स्वच्छ भारत अभियान में सहयोग के लिए बोला गया था तब ऐसे कई संगठनों ने खुले में शौच का बहाना लेकर गरीब एवं निम्न वर्ग के लोगों पर हिंसक और जानलेवा हमले किये थे।

कहीं गौरक्षा वाले संगठन बुज़ुर्गों पर हमला ना कर दें

फोटो साभार- सोशल मीडिया
गौरक्ष दल। फोटो साभार- सोशल मीडिया

इस से भी आगे ऐसे कई संगठनों का काम ही गौरक्षा के नाम पर हिंसा फैलाना रहा है। याद रहे ज़्यादातर राज्य जहां कि गौरक्षा के नाम पर हिंसा होती आई है, वहां गौहत्या या गौतस्करी अपराध है और उसे रोकना पुलिस का काम है ना कि किसी नागरिक संगठन का।

तब भी कानून की मदद के नाम पर ये संगठन खुद ही आपराधिक गतिविधियों में लिप्त हो जाते हैं। ऐसे कई मामले सामने आए हैं जबकि इन संगठनों ने गरीब लोगों से उगाही की और बेवजह उन पर हमला किया।

अगर हम इन संगठनों के इस इतिहास को सामने रखें तो प्रधानमंत्री जी के इस बयान में समझदारी की कमी या तो नज़र आती है अथवा यह एक प्रयास है, जहां पर कि उनकी पार्टी से संबंध रखने वाले संगठनों को हिंसा की खुली अनुमति दे दी गई है।

खुदा ना करे कि ऐसा हो लेकिन मुझे यह डर है कि ये संगठन किसी भी बुज़ुर्ग पर यह कहकर हमला कर सकते हैं कि प्रधानमंत्री जी ने उनको घर में रहने के लिए बोला है और यही देशहित है या किसी के समारोह पर भी हमला हो सकता है।

भारत के पास पर्याप्त सेना, अर्द्धसेना, पुलिस एवं अर्द्धपुलिस मौजूद है। मेरा मानना है कि इन नियमों को लागू करने की ज़िम्मेदारी निभाने के लिए वे काफी हैं। इसके अलावा किसी संगठन को सहयोग के नाम पर मुख्यधारा में लाना अथवा उसको किसी भी प्रकार से मौका देना देश के वर्तमान परिपेक्ष में ठीक नहीं है।

हो सकता है प्रधानमंत्री जी की मंशा बहुत अच्छी रही हो लेकिन जिस तरह से उन्होंने संदेश दिया है, वह बहुत से हिंसक संगठनों के मनोबल को अवश्य बढ़ावा देगा। मेरा अनुरोध है कि प्रधानमंत्री जी इस बयान पर पुनर्विचार करें।

Sign this petition to demand expanding of screening beyond government hospitals, to pre-empt the disease from becoming an epidemic.
As the coronavirus pandemic continues, it is our duty to keep ourselves informed, take care of our own health, and wash our hands! Some simple measures that we must follow include social distancing, covering our mouth when coughing and sneezing, washing one's hands regularly, and avoid crowded places, and self-quarantine! The helpline provided by the government is +91-11-23978046. Here are some resources that the WHO and the Health Ministry have created. Remember, prevention, and not panic, will see us through this!

Youth Ki Awaaz के बेहतरीन लेख हर हफ्ते ईमेल के ज़रिए पाने के लिए रजिस्टर करें

Similar Posts

A former Assistant Secretary with the Ministry of Women and Child Development in West Bengal for three months, Lakshmi Bhavya has been championing the cause of menstrual hygiene in her district. By associating herself with the Lalana Campaign, a holistic menstrual hygiene awareness campaign which is conducted by the Anahat NGO, Lakshmi has been slowly breaking taboos when it comes to periods and menstrual hygiene.

A Gender Rights Activist working with the tribal and marginalized communities in india, Srilekha is a PhD scholar working on understanding body and sexuality among tribal girls, to fill the gaps in research around indigenous women and their stories. Srilekha has worked extensively at the grassroots level with community based organisations, through several advocacy initiatives around Gender, Mental Health, Menstrual Hygiene and Sexual and Reproductive Health Rights (SRHR) for the indigenous in Jharkhand, over the last 6 years.

Srilekha has also contributed to sustainable livelihood projects and legal aid programs for survivors of sex trafficking. She has been conducting research based programs on maternal health, mental health, gender based violence, sex and sexuality. Her interest lies in conducting workshops for young people on life skills, feminism, gender and sexuality, trauma, resilience and interpersonal relationships.

A Guwahati-based college student pursuing her Masters in Tata Institute of Social Sciences, Bidisha started the #BleedwithDignity campaign on the technology platform Change.org, demanding that the Government of Assam install
biodegradable sanitary pad vending machines in all government schools across the state. Her petition on Change.org has already gathered support from over 90000 people and continues to grow.

Bidisha was selected in Change.org’s flagship program ‘She Creates Change’ having run successful online advocacy
campaigns, which were widely recognised. Through the #BleedwithDignity campaign; she organised and celebrated World Menstrual Hygiene Day, 2019 in Guwahati, Assam by hosting a wall mural by collaborating with local organisations. The initiative was widely covered by national and local media, and the mural was later inaugurated by the event’s chief guest Commissioner of Guwahati Municipal Corporation (GMC) Debeswar Malakar, IAS.

Youth Ki Awaaz के बेहतरीन लेख पाइये अपने इनबॉक्स में

फेसबुक मैसेंजर पर Awaaz बॉट को सब्सक्राइब करें और पाएं वो कहानियां जो लिखी हैं आप ही जैसे लोगों ने।

मैसेंजर पर भेजें

Sign up for the Youth Ki Awaaz Prime Ministerial Brief below