Site icon Youth Ki Awaaz

“याद आता है कानपुर का नाना राव पार्क और गंगा के तट का नज़ारा”

फोटो साभार- आंचल शुक्ला

फोटो साभार- आंचल शुक्ला

लॉकडाउन के चलते सब अपने-अपने घरों में कैद हो गए हैं। सच कहूं तो मानो अब जी ऊब सा गया है। अब मन करता है कहीं घूमने जाने और घर से बाहर निकलने का।

मन करता है बिठूर में गंगा के किनारे पर बैठने का, वहां की ताज़ी हवा खाने का। यही नहीं, गंगा किनारे बैठकर सूरज को ढलते हुए देखने का भी मन करता है। ज़रा सोचिए प्रदूषण ना होने की वजह से गंगा जी के तट का नज़ारा भी देखने लायक होगा।

नाना राव पार्क की यादें

अब बिठूर की याद आई तो भला नाना राव पार्क को कैसे भूल सकती हूं। कानपुर की धरोहर का बेमिसाल हिस्सा जो है वह! यहां आपको भारत के इतिहास के दर्शन हो जाएंगे। यहां की हरियाली आपको मोह लेगी। ऐसे में फूलबाग की भी बहुत याद आती है।

फूलबाग मैदान को कानपुर की धड़कन भी कहा जाता है। इस मैदान से कई इतिहास के पन्ने जुड़े हुए हैं। कई राजनेताओं का राजनीतिक सफर भी यहीं से शुरू हुआ।

अटल बिहारी बाजपेयी जी ने अपने राजनीतिक सफर की शुरुआत यहीं से की थी। जब उन्होनें इस मैदान से हुंकार भरी थी, तब यहां का रास्ता जाम हो गया था। आज भी सुबह और शाम यहां लोग घूमने के लिए निकलते हैं। 

अब तो दिन और भी बड़े लगने लगे हैं

लॉकडाउन के चलते दिन और भी बड़े लगने लगे हैं। काम करना, खाना खा लेना फिर सो जाना। लगता है मानो किसी ने पैरों में ज़ंजीर बांध दी है। चाहते हुए भी बाहर नहीं निकल सकते हैं। तो अब उन सब स्थानों को याद करके ही मन भरना पड़ रहा है। 

कितने समय से चिड़ियाघर और मोतीझील जाना भी नहीं हुआ है। चिड़ियाघर जाना और वहां देर तक घूमना फिर घास पर बैठकर सबके साथ खाना खाना।

यह सब कुछ बहुत मिस कर रही हूं। चिड़ियाघर का खयाल आते ही दिमाग में एक बात आती है कि जैसे वहां के सभी जानवर पिंजरे में कैद रहते हैं। वही हालत अब हम इंसानों की भी हो गई है। इस लॉकडाउन के बाद गर्मियों में मोतीझील में घूमना सच में बेहद आनंद देता है।

कानपुर का जे.के. मंदिर

जब बात कानपुर की हो तो भला जे.के. मंदिर को कैसे भूल सकते हैं। यहां प्रवेश करते ही मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति का अनुभव होता है। जे.के. मंदिर जो कानपुर की सुंदरता को चार चांद लगाता है। यह देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

मूल रूप से राधा-कृष्ण जी को समर्पित है यह बेहद खूबसूरत मंदिर। मन्दिर में प्रवेश करने पर फव्वारा और चारों ओर फैली हरियाली हर किसी के मन को मोह लेती है।

इस परिसर में सकारात्मक ऊर्जा आपको हर ओर महसूस होगी। सच में इन सभी स्थलों को बहुत मिस कर रही हूं। ऐसी गर्मी में वहां का वातावरण, वहां पेड़ों से निकलने वाले हवाओं के झोंकों को बहुत याद कर रही हूं।

अब जब लॉकडाउन 3 मई तक बढ़ गया है तो बाहर जाने के बारे में सोच भी नहीं सकते हैं। फिलहाल घर पर रहकर ही काम चलाना पड़ेगा। यही एकमात्र रास्ता है। कानपुर से लगाव का कारण यहां उपस्थित सभी पर्यटक स्थल हैं जो कानपुर की शान को बढ़ाते हैं।

Exit mobile version