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आइए आपको छत्तीसगढ़ में पहाड़ों के बीच बसे मेरे गाँव की सैर कराता हूं

हमारा देश गाँवों का देश है। गाँव का नाम सुनते ही हमारे मन-मस्तिक में प्राकृतिक सौंदर्य जैसे पर्वत, पेड़-पौधे, झरने, नदी, नाले के साथ-साथ शुद्ध वातावरण का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। गाँव में रहने वालों की जीवन शैली बहुत ही सरल होती है।

गाँव के लोगों का रहन-सहन, उनकी संस्कृति, उनके गीत-संगीत, नाच, देवी-देवताओं की पूजा, खान-पान यह सब गाँव के आकर्षण का हिस्सा है। गाँव ऐसे स्थानों को कहा जाता हैं जहां पर कृषि कार्य किया जाता है, जहां प्राकृतिक सौंदर्य लोगों का मन मोह लेता है। 

शहर के कई लोगों को गाँव की मनमोहक चीज़ों के बारे में तो पता है लेकिन यहां कई प्रकार की समस्याएं होती हैं। कई गाँव में औद्योगिक क्षेत्र के योगदान में कमी होती है और लोगों को बिजली की समस्या और पेयजल की असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा सरकारी योजनाओं के ठीक से लागू ना करने की वजह से लोगों को बहुत तकलीफ होती है।

कुएं से पानी निकालते हुए।

मुझे मेरा गाँव, उसके लोग, उसकी संस्कृति पर गर्व है और मेरा यह मानना है कि असली भारत गाँव में बसा है और इनसे सीखने के लिए बहुत कुछ है। गाँव के किसान और काम करने के लिए गाँव से शहर गए हुए हमारे बंधु भारत का आधार हैं और हमें भारत के गाँव के कल्याण के लिए प्रयास करने चाहिए।


लेखक के बारे में- राकेश नागदेव छत्तीसगढ़ के निवासी हैं और मोबाइल रिपेयरिंग का काम करते हैं। वो खुद की दुकान भी चलाते हैं। इन्हें लोगों के साथ मिल जुलकर रहना पसंद है और वो लोगों को अपने काम और कार्य से खुश करना चाहते हैं। उन्हें गाने का और जंगलों में प्रकृति के बीच समय बिताने का बहुत शौक है।

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