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“मुझे क्लास में आत्महत्या के ख्याल आते थे”

a person hiding behind books

हमारी सोसाइटी में ऐसा माहौल बना दिया गया है कि बोर्ड एग्जाम में अच्छे मार्क्स लाना ही सबकुछ हैं। जब हमारा रिजल्ट आने वाला होता हैं, तो रिश्तेदार भी फोन करके बोलते हैं कि मार्क्स अच्छे आने चाहिए। तभी कहीं जाकर फ्यूचर सेट होगा।

घर वाले भी बच्चों से अच्छे मार्क्स आने के आश में बैठे रहते हैं। भाई बैठे क्यों ना आखिर उनकी भी तो हमसे कुछ उम्मीदें हैं। आखिर उन्होंने हमारी हर छोटी-बड़ी हर एक ख्वाहिश पूरी करने में कोई कमी नहीं छोड़ी हैं लेकिन वे अपनी आशा के चक्कर में यह भूल जाते हैं कि बच्चों के भी तो कुछ अपने सपने होते हैं।

सिर्फ पढ़ाई में ही कुछ अच्छा करना ज़रूरी तो नहीं है, बहुत सारे ऐसे फील्ड हैं जिनमें हम कुछ अच्छा कर सकते हैं। सभी डॉक्टर, इंजीनियर, आईएएस अफसर तो नहीं बन सकते हैं।

हां, पढ़ाई भी ज़रूरी है लेकिन इतना ज़्यादा प्रेशर कि बच्चा किसी को बता भी ना पाए और अकेले ही घूट-घूट कर जिए यह भी तो सही नहीं होगा। बच्चा पढ़ाई का इतना प्रेशर ले लेता है कि कम नम्बर आने पर अपनी ज़िंदगी तक खत्म करने की सोच लेता हैं, क्योंकि उसे सोसाइटी के तानों से भी तो डर लगने लगता हैं कि क्या कहेंगे लोग?

मैं खुद के 12th के रिजल्ट की बात करूं, तो मैं रिजल्ट वाले दिन इतने प्रेशर में था कि जब मैंने रिजल्ट देखा तो मैंने सुसाइड करने तक का मन बना लिया था। मैं रिजल्ट देख कर रोने लगा था इसलिए नहीं कि मेरे मार्क्स कम आए हैं, बल्कि इसलिए कि मैं क्लास में टॉप स्टूडेंट्स में नहीं आया था। जिसकी मुझसे सबको उम्मीद थी। मैं क्लास में टॉप नम्बर ना ला पाने के कारण बहुत ज़्यादा तनाव में था।

मैं सुसाइड का मन बना ही चुका था कि मेरे दोस्त का फोन आया और उसने मुझे बहुत समझाया कि सिर्फ अच्छे मार्क्स ही सब कुछ नहीं होते टैलेंट भी कोई चीज़ होती है। सिर्फ सोसाइटी के प्रेशर से अपनी जिंदगी खत्म कर लेना कोई समझदारी नहीं हैं।

सभी लोग कोई-न-कोई टैलेंट लेकर इस दुनिया में आए हैं, ज़रूरी नहीं कि पढ़ाई में ही अच्छा करना ही जीवन का लक्ष्य हैं। ऐसे बहुत से महान लोग इस देश में पैदा हुए हैं जो पढ़ाई में अच्छे नहीं थे लेकिन उन्होंने वो कर दिखाया जो शायद ही कोई कर पाए। इस सोसाइटी को कौन समझाए कि पढ़ाई ही सबकुछ नहीं हैं।

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