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हिन्दी कविता: हां! मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं

मुसलमानों की एकता

मुसलमानों की एकता

फूलों की सुगंध सा

कविता में छंद सा,

चंदा में प्रकाश जैसा

जुगनू में चमक के समान हूं

हां! मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं।

 

जंग में मैं वीर हमीद

शिक्षा का आज़ाद हूं

विज्ञान में कलाम,

गुलामी मे अशफाक उल्ला महान हूं

हां! मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं।

 

मुझे विदेशी कहने वालों

ऐसे ना तुम सतलाओ,

जैसा तुम, वैसा मैं भी

इसी देश की संतान हूं

हां! मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं।

 

मेरे भ्राता, मेरे बंधु मुझे बुरा ना बतलाना

बारिश की बूंदों जैसा,

मैं बेहतर इंसान हूं

हां! मैं हिंदुस्तानी मुसलमान हूं।

 

प्रलय हो या होगी रहमत

इसे छोड़ ना जाएंगे,

इस मिट्टी में खेले-कूदे

इसकी गोद में दफन हो जाएंगे।

Pic Credit: Flickr

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