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समाज में हमारे लिए जाति, हमारी प्रतिष्ठा का अहम प्रश्न क्यों है?

समाज में हमारे लिए जाति, हमारी प्रतिष्ठा का अहम प्रश्न क्यों है?

समाज में आपको यदि किसी से प्रेम या विवाह करना है तो यह आपकी स्वतंत्र इच्छा नहीं हो सकती है। हमारे समाज में प्रेम के लिए कुछ ऐसे नियम बना दिए गए हैं जो धर्म और जाति के आधार पर हैं जैसे: व्यक्ति को अपने धर्म और जाति के अंतर्गत ही विवाह करना चाहिए, अगर कोई ऐसा नही करता है तो समाज में उपस्थित जाति की घटिया संकीर्ण मानसिकता से ग्रस्त लोग उन्हें मार देते हैं।

ऐसी संकीर्ण मानसिकता से ग्रसित लोग जिनके दिमाग में जाति और संस्कारों का ज़हर भरा हुआ है, वे लगातार अपने इस ज़हर से मासूमों की जान ले रहे हैं।

आज भी हम देखते हैं कि यदि कोई व्यक्ति अपनी जाति से इतर किसी दूसरी जाति में विवाह करना चाहता है तो समाज के एवं उसके स्वयं के परिजन अपनी झूठी शान-शौकत  के लिए ऐसे युगल प्रेमियों को मौत के घाट उतार देते हैं।

लव जिहाद, समाज की संकीर्ण एवं घटिया मानसिकता की खोज है 

2015 में केरल से हादिया का मामला सामने आया जिसमें एक हिन्दू लड़की, अपने मुस्लिम प्रेमी के साथ रहना चाहती थी। लड़की के परिवार वालों ने लड़के के दूसरे धर्म के होने के कारण इस बात को मानने से इनकार कर दिया। लड़की के विरोध करने पर उसके स्वयं के परिवार वालों ने उसे अपने ही घर में कैद कर दिया और लड़के के खिलाफ लव जिहाद का मामला कोर्ट में दाखिल कर दिया गया।

हमें इन प्रेमियों के हौसले को सलाम करना चाहिए जो स्वयं के परिवार और समाज के गलत विरोध के सामने झुके नहीं। इससे हमें यह जरूर पता चलता है कि जिंदा मुर्दों की भीड़ में अब भी कुछ लोग जिंदा हैं जो परिवर्तन के लिए अपनों और पराए दोनों से लड़ रहे हैं। 

इससे भी भयानक और भयावह एक मामला राजस्थान से अफराजुल का आया था, जिसे लव जिहाद के नाम पर आरोपी संभूलाल रेगर ने जिंदा जला दिया था। मानवीय क्रूरता की इतनी ऊंची पराकाष्ठा कि वहां तक कोई दानव ही पहुंच सकता है। आरोपी रेगर ने अफराजुल को मारते हुए एक वीडियो बनाया जिसमें वह कह रहा होता है कि तुम साले जिहादी हो, तुम हमारी महिलाओं को अपने प्यार के चक्कर में डालकर उनका धर्म परिवर्तन करवाते हो।

 भला प्रेम का भी प्रेम के अलावा कोई और धर्म हो सकता है?

नवी मुंबई के 16 वर्षीय स्वप्निल सोनवाने का कत्ल इस लिए कर दिया गया क्योंकि, वह कथित तौर पर दलित था और वह ऊंची जाति की लड़की से प्रेम करता था। अब आप बताइए कि अब इसे हमारा समाज क्या नाम देगा? क्योंकि यहां तो हिन्दू-मुस्लिम की दाल नही गल पाएगी लेकिन हमारे समाज में ऐसे मामलों को बड़ी चालाकी से दबा दिया जाता है।

हम अपने धर्म में तथा धर्म के बाहर प्रेम करने पर प्रतिबंधित हैं क्योंकि हमारे समाज में केवल धर्म के आधार पर ही नहीं बल्कि जाति, वर्ग और पैसे के आधार पर प्रेम या विवाह होता है। हम बस कहते रहते हैं कि हमारे देश की  विभिन्नता में एकता है, बल्कि हकीकत इससे बिल्कुल भी मेल नही खाती है।

खून चेहरे (FACE) पर लगा है और हम आईने (MIRROR) को साफ करने में लगे हैं, कागजों पर कानून तो बनते हैं लेकिन उन्हें जमीन पर कौन उतारेगा?

धारा 377 का रद्द होना, एक स्वस्थ समाज के लिए स्वागत योग्य पहल है 

धारा 377 (अप्राकृतिक अपराध: जो कोई भी अपनी स्वेच्छा से किसी भी पुरुष, महिला या जानवर के साथ प्रकृति के आदेश के खिलाफ यौन संबंध रखता है, उसे आजीवन कारावास या किसी विवरण के लिए या तो विवरण के कारावास के साथ दंडित किया जा सकता है जो विस्तारित हो सकता है दस साल और जुर्माना के लिए भी उत्तरदायी होगा) को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा हटाने पर समाज के उन लोगों ने खुशी नहीं जताई जिन्हें धारा 370 हटने पर बहुत खुशी थी।

 मेरे यह कहने का मतलब है कि कुछ लोग चाहते हैं कि सब उनके हित में ही हो, चाहे वो हकीकत में उनके हित के लिए ना भी हो। समलैंगिकता अब गैर कानूनी कागज पर नहीं रहा, लेकिन समाज में तो आज भी समलैंगिक सम्बन्धों को लोग नीची निगाहों से देखते हैं। हमारा झूठा समाज अपनी झूठी प्रतिष्ठा के लिए इसे स्वीकार करने में असमर्थ है जिसके कारण अधिकतर समलैंगिक संबंध सामने नहीं आ पाते हैं।

उन्हे डर है कि अगर सबको पता चल गया तो समाज में उनके माता-पिता का सम्मान गिर जाएगा और लोग उनके सम्बन्ध को और उन्हे स्वीकार नहीं करेंगे, उनका सम्मान नहीं करेंगे।

वैलेंटाइन डे पर प्रेमी डरे रहते हैं कि कहीं कोई उन पर हमला ना कर दे। कोई अपनी झूठी इज्ज़त की खातिर प्रेमियों को बलि का बकरा ना बना ले। हमारे समाज में लगातार उनके प्यार की निजता के अधिकार पर लगातार हमले किए जा रहे हैं।

यह प्रेम है या प्रेम की पुड़िया में डर कि  इससे समाज मे  मानव खुलकर प्रेम करने से डरता है जिसके कारण वह अब अपनी हवस को ही प्रेम कहने लगा है। इस विषय पर हम आगे और बात करेंगे जो आपको स्त्री विषयक  विचार-विमर्श में देखने को मिलेगी। 

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