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सावन और शिव पूजा का महत्व

सावन और शिव पूजा का महत्व

सावन के महीने में काली घनघोर घटाओं के बीच आंख मिचौली करता हुआ बादल, खेतों की मिट्टी से उड़ती हुई सोंधी-सोंधी खुशबू, बागों में चहचहाती चिड़ियां व झूमते हुए मयूर, रिमझिम फुहारों के साथ पत्तों को स्पर्श कर धरती को चूमती हुई बारिश की बूंदों का नजारा किसी के भी मन को रोमांचित कर देता है। 

सावन आता है तो गाँवों में मल्हारें गाते हुए रिमझिम बरसात में झूलों का लुत्फ उठाते हुए महिलाएं व बच्चे, बहन- भाई के सबसे बड़े पवित्र त्यौहार रक्षाबंधन और हरियाली तीज व शिवरात्रि पर्व का इंतज़ार करते हैं। ऐसे में यह कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि सावन का मौसम सुहागन स्त्रियों, बच्चों और शिव भक्तों के लिए तीज त्यौहार व व्रत का एक उत्सव है।

हास विलास उल्लास के साथ-साथ सावन का सबसे गहरा नाता शिव से भी है, क्योंकि यह महीना भोलेनाथ को बेहद प्रिय है। पौराणिक कथाओं के अनुसार देवी सती ने अपने पिता दक्ष के घर में योगशक्ति से शरीर त्याग किया था। उससे पहले देवी सती ने महादेव को हर जन्म में पति के रूप में पाने का प्रण किया था। दूसरे जन्म में महाराज हिमालय और रानी मैना के यहां देवी सती ने पार्वती के नाम से जन्म लिया था और शिव को पाने के लिए युवावस्था में अन्न-जल त्याग कर सावन के महीने में कठोर व्रत किया, तब शिव ने प्रसन्न होकर पार्वती से विवाह किया था। सती से पुनर्मिलन होने के कारण तभी से देवों के देव महादेव के लिए यह मास विशेष हो गया।

ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव पृथ्वी पर अवश्य आते हैं। इसी विश्वास के कारण ही भक्त कंधों पर कांवर उठाए नंगे पैर शिव धाम की और चल पड़ते हैं और सावन में सम्पूर्ण भारत देश महादेव के रंग में सराबोर हो जाता है। सावन में, जहां सुहागन स्त्रियां अपने पति के कल्याण के लिए भगवान शिव की पूजा करती हैं तो कुंवारी लड़कियां भी शिव जैसे उदार व अगाध प्रेम करने वाले पति की चाह में सावन के सभी सोमवार को शिव का अभिषेक और सोलह सोमवार का व्रत भी रखती हैं।

शास्त्रों में सावन माह को बहुत ही पवित्र माना गया है। हिंदू धर्म में सावन का बहुत महत्व है। इस महीने में भगवान शिव की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है। ऐसा कहते हैं कि सावन में सच्चे दिल से आराधना करने वाले भक्तों की भगवान शिव सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। सोमवार का व्रत और पूजा करने से जीवन में विवाह संबंधी परेशानियों में भी लाभ मिलता है। वर्ष 2021 में 24 जुलाई को आषाढ़ का महीना समाप्त और 25 जुलाई, रविवार से सावन का महीना शुरू हुआ था। इस बार सावन के चार सोमवार व्रत इस अनुसार, जिसमें पहला 26 जुलाई, दूसरा 2 अगस्त, तीसरा 9 अगस्त तथा आखिरी सोमवार व्रत 16 अगस्त को था।

सावन माह पूजा- विधि

सुबह-सवेरे ज़ल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होने के बाद साफ-सुथरे वस्त्र धारण कर घर के मंदिर में श्रद्धा का एक दीप प्रज्वलित करें और सभी देवी- देवताओं का गंगाजल से अभिषेक कर शिवलिंग पर गंगा जल और दूध चढ़ाएं तथा भगवान शिव को पुष्प व बेल पत्र अर्पित करें और उसके बाद भगवान शिव की आरती करें और भोग लगाएं। इसके साथ ही इस बात का भी ध्यान रखें कि भगवान को सिर्फ सात्विक चीज़ों का भोग लगाया जाता है।भगवान शिव का अधिक-से-अधिक ध्यान करें।

भगवान शिव की पूजा में पुष्प, पांच फल, पांच मेवा, रत्न, सोना, चांदी, दक्षिणा, पूजा के बर्तन, कुशासन, दही, शुद्ध देशी घी, शहद, गंगा जल, पवित्र जल, पांच रस, इत्र, गंध रोली, मौली जनेऊ, पांच तरह की मिठाइयां, बिल्वपत्र, धतूरा, भांग, बेर, आम्र मंजरी, जौ की बालें, तुलसी दल, मंदार पुष्प, गाय का कच्चा दूध, ईख का रस, कपूर, धूप, दीप, रूई, मलयागिरी, चंदन, शिव व मां पार्वती के श्रृंगार हेतु इस सामग्री का प्रयोग किया जाता है।

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