Site icon Youth Ki Awaaz

#PeriodPaath: दूर-दराज के गाँव तक नैपकिन की पहुँच

सरपंच
मानपुर पंचायत
सलूम्बर तेहसील
उदयपुर, राजस्थान

सरपंच मोहदय,

मैं, भेरू लाल, अपनी पत्नी, दो बेहेने एवं माता-पिता के साथ राजस्थान राज्य के उदयपुर जिले के मानपुर गाँव में रहता हूँ, जो उदयपुर शहर से 100 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। मैं अपने गाँव में बेसिक हैल्थकेयर सर्विसेज संस्था द्वारा स्थापित प्राथमिक स्वस्थ्य केंद्र पर कार्यकर्ता हूँ।

मेरे घर पर तीन महिलाएँ प्रजनन के उम्र के वर्ग में है जिसमें से मेरी दो बेहने हैं जो विद्यालय जाती हैं, एवं मेरी पत्नी है। मेरी पत्नी माहवारी के दौरान कपडे का उपयोग करती है। वह यह भी नहीं जानती थी कि कपडे के अलावा और भी विकल्प उपलब्ध हैं। अभी कुछ वर्षों से विद्यालय के माध्यम से मेरी बहनों को सैनिटरी नैपकिन मिल रहे है जिसके कारण मेरी पत्नी को भी जानकारी प्राप्त हुई है। परन्तु समस्या यह है कि सैनिटरी नैपकिन विद्यालय में जाने वाली किशोरियों के अलावा गाँव में किसी भी महिला के लिए आसानी से उपलब्ध नहीं है। जो सबसे नजदीकी दवाई की दुकान है, वह गाँव से 10 किलोमीटर दूर है जहाँ आसानी से जाना संभव नहीं है। इसके कारण मेरी पत्त्नी दूसरों पर निर्भर हो जाती है।

मेरे कार्य से मुझे यह अनुभव है कि यह समस्या गाँव में रहने वाली काफी महिलाओं को आती है। सरकारी निर्देशानुसार सरकारी भवन जैसेकि स्कूल, प्राथमिक और उप स्वास्थ्य केंद्रे, आँगनवाड़ी पर सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध होने चाहिए। गाँव में सबसे नजदीक सिर्फ आंगनवाड़ी और उप स्वस्थ्य केंद्र हैं, जो कि दिन के केवल 3-4 घंटे खुले होते हैं। जिस कारण महिला केवल उतने समय इसका लाभ ले सकती है। कई बार आपूर्ति में कमी होने के कारण जरुरत अनुसार इन केंद्रों पर भी महिलाओं को नैपकिन नहीं मिलता।

इसके अलावा गांव की महिलाओं में सैनिटरी नैपकिन के उपयोग से जुडी जानकारी का आभाव है। इसलिए नैपकिन के साथ इसके इस्तमाल करने की विधि बताते हुए एक पर्चा दिया जाये। इस पर्चे पर जानकारी अगर चित्र के माध्यम से दी जाये तो अशिक्षित महिला भी इसका उपयोग कर सकती। आशा करता हूँ कि आप मेरे द्वारा किये गए सुझाव पर गौर करे एवं तत्काल प्रभाव से जगह जगह नैपकिन उपलब्ध करवाए ताकि मेरी हर बेहन महावारी के समय सहज और स्वस्तंत्र रूप से जी सके।

भवदीय,
भेरूलाल मीणा

Exit mobile version